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Ranchi news- आपातकाल की 46वीं बरसी: इमरजेंसी की घोषणा के 6 महीना पहले से बनायी जा रही थी आनंदमार्गियों की गिरफ्तारी की योजना

जमशेदपुरआनंद मार्ग प्रचारक संघ के धर्म प्रचार सचिव आचार्य सत्य आश्रयनंद अवधूत ने बताया कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू करने के छह महीना पहले से ही आनंदमार्गियों की गिरफ्तारी की योजना बनायी जा रही थी। आचार्य सत्य आश्रयनंद अवधूत आपातकाल की याद में शुक्रवार को आयोजित विरोध दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।धर्म प्रचार सचिव आचार्य सत्य आश्रयनंद अवधूत ने बताया कि 25 जून 1975 को पूरे भारतवर्ष में इमरजेंसी लगा दिया गया और आपातकाल की घोषणा के साथ ही आनंद मार्ग के लगभग एक सौ से भी ज्यादा संगठनों को बैन कर दिया गया। आनंदमार्गी अनुयायियों को जेल भेजा गया और उन पर सबसे ज्यादा अत्याचार किया गया। आनंद मार्ग के गुरु संस्थापक भगवान आनंदमूर्ति को चिकित्सा के नाम पर जहर दिया गया, लेकिन वे किसी तरह बाल बाल बच गए।

‘पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने इंदिरा को पत्र लिखकर बनाई थी योजना’वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर की पुस्तक ‘द इमरजेंसी’ में लिखकर बताया है कि आनंदमार्गियों को गिरफ्तार करने की योजना इमरजेंसी के 6 महीना पहले से ही बनाई जा रही थी। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सहपाठी भी थे। उन्होंने इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर आनंदमार्गियों की गिरफ्तारी की योजना बनायी।

सिनेमा हॉल में आनंद मार्ग के विरुद्ध विज्ञापन दिखाया जाता थाकूमी कपूर ने अपनी पुस्तक ‘द इमरजेंसी’ में सिद्धार्थ शंकर रे की ओर से इंदिरा गांधी को लिखा गया पत्र को प्रकाशित किया है। इससे साफ जाहिर होता है कि इमरजेंसी के बहाने आनंद मार्गियों को खत्म करने की साजिश थी। आनंद मार्ग के गुरु आनंदमूर्ति को काफी टॉर्चर किया गया और उनके अनुयायियों पर भी काफी अत्याचार किया गया। सिनेमा हॉल में आनंद मार्ग के विरुद्ध विज्ञापन दिखाया जाता था। जिसमें बताया जाता कि आनंद मार्ग का मतलब ‘बच्चा चोर और मुरी कटवा’ हुआ करता था, ताकि आम जनता में भय और घृणा का माहौल उत्पन्न हो। सरकारी नौकरी में काम करने वाले लोगों को आनंद मार्ग छोड़ देने के लिए कहा गया, साथ ही यह भी चेतावनी दी गयी जो आनंद मार्ग नहीं छोड़ेंगे, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आपातकाल की आंखों-देखी : गोलियां… तोड़फोड़… जेपी… और फिर आधी रात को इमरजेंसी

आनंद नगर को सरकार के सहयोग से गुंडों ने पूरा जला दियाजमशेदपुर के स्वर्गीय ठाकुर जी सिंह आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए। स्वर्गीय ठाकुर जी सिंह की पत्नी उर्मिला देवी बताती हैं कि जब देश में आपातकाल लगा था, तब पति जेल चले गए। उनके बड़े बेटे सत्येंद्र सिंह उर्फ जयदेव आनंद मार्ग के मुख्यालय आनंद नगर में पढ़ाई करते थे, पता चला कि आनंद नगर को सरकार के सहयोग से गुंडों ने पूरा जला दिया है, हॉस्टल में पढ़ने वाले बच्चों को भगा दिया गया। सभी बच्चे किसी तरह अपने-अपने घर शायद पहुंच पाए होंगे, और उनका बच्चा भी अचानक घर पहुंचा तब उसने बताया कि सभी शिक्षकों और आनंद नगर में रहने वाले संन्यासियों को जेल भेज दिया गया है। पति जेल चले गए और कई बच्चे बिछड़ गये, आपातकाल देश में किस तरह क्रूरता पूर्ण रवैया अपनाया था, जो कोरोना से भी खतरनाक था।

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