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Jharkhand Live News – Chaitra Navratri 2021: घोड़े आएंगी और नर वाहन पर विदा होंगी मां दुर्गा, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त:

शारदीय नवरात्र की तरह है चैत्र नवरात्र का भी अति महत्व है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र का पावन पर्व 13 अप्रैल को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान नौ दिन तक पूरे विधि विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा की जाएगी। चैत्र नवरात्र के लिए अभी से लोग तैयारी में जुट गए हैं। शहर के शक्ति मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर, भुईंफोड़ मंदिर सहित कई देवी स्थलों में कलश स्थापना की जाएगी। वहीं कई श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापित कर विधि-विधान से देवी की आराधना करेंगे।

खड़ेश्वरी मंदिर के पुजारी राकेश पांडेय बताते हैं कि इस वर्ष मां का आगमन घोड़े पर हो रहा है। देवी भागवत पुराण के अनुसार इसे राजनीति के क्षेत्र में उथल-पुथल और पड़ोसी देश से युद्ध के संकेत बताया गया है। वहीं मां का गमन नर वाहन से हो रहा है, जो सुखद कारक है। अर्थात भले ही राजनीतिक उथल-पुथल हो लेकिन इसका परिणाम और अंत सुखद होगा।

भक्ति और शक्ति दोनों प्रदान करेंगी मां दुर्गा

वेदाचार्य पंडित रमेशचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि इस बार चैत्र नवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस बार चार रवियोग, एक सर्वार्थ अमृत योग सिद्धि योग, एक सिद्धि योग तथा एक सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ऐसे शुभ संयोग में नवरात्रि पर देवी उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। यह नवरात्रि माता अपने भक्तों को धन ही नहीं बल्कि भक्ति से भी परिपूर्ण करेंगी। 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वासंतिक नवरात्रि अश्विनी नक्षत्र एवं सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में आरंभ होकर 22 अप्रैल गुरुवार को मघा नक्षत्र व सिद्धि योग में विजयादशमी के साथ संपन्न होगी। पूरे नवरात्रि माता की कृपा पाने के लिए दुर्गा सप्तसती, दुर्गा चालीसा, बीज मंत्र का जाप, भगवती पुराण आदि का पाठ करने से सुख व समृद्धि की प्राप्ति होगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त:

13 अप्रैल: प्रात: 5.43 बजे से 8.43 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11.36 बजे से 12.24 बजे तक

अमृत मुहूर्त. दोपहर 11.50 बजे से 1.25 बजे तक

चैत्र नवरात्र पर शक्ति मंदिर में होगी भारत माता की आरती

शक्ति मंदिर में विशेष रूप से चैत्र नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ मां भारती की भी पूजा होती है। शक्ति मंदिर के प्रबंधक बृजेश मिश्र बताते हैं कि नया संवत प्रारंभ होता है, इस कारण यहां की परंपरा में देवी की पूजा के साथ-साथ मां भारती भी पूजी जाती हैं। नियमित रूप से भारत माता की आरती की जाती है। आरती में काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती है। हालांकि इस वर्ष कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सीमित संख्या में ही आरती में आमलोगों के प्रवेश की अनुमति दी गई है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

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