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Jharkhand Live News – प्रारंभिक परीक्षा में नहीं मिल सकता आरक्षण का लाभ: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। राज्य में वर्ष 2018 में दारोगा नियुक्ति के लिए ली गयी प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का प्रावधान राज्य सरकार के नियमों और शर्त के आधार पर किया गया है।

झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग ने पीटी में आरक्षण नहीं देने का निर्णय सरकार के नियमों के अनुसार किया गया है, जो सही है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने इस आदेश के साथ ही पीटी में आरक्षण का लाभ देने वाली याचिका खारिज कर दी। गुलाम सादिक एवं अन्य ने पीटी में आरक्षण देने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी और दारोगा नियुक्ति को रद्द करने का आग्रह किया था। 

झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोजन ने दारोगा की 3019 पदों  पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2017 में विज्ञापन निकाला था। इसमें पीटी में आरक्षण नहीं दिया गया था। रिजल्ट निकलने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने एकलपीठ में याचिका दायर कर पीटी में आरक्षण देने की मांग की थी। एकल पीठ ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। इसके बाद खंडपीठ में अपील याचिका दायर की गयी। 

सोमवार को इस मामले पर लंबी सुनवाई हुई। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड गठन के बाद वर्ष 2002 में राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बिहार असैनिक सेवा और बिहार कनीय असैनिक सेवा भर्ती नियमावली 1951 को अंगीकार किया। वर्ष 2002 में ही इसे झारखंड में लागू किया गया।

इसके बाद इसी आधार पर झारखंड में परीक्षा ली गयी। चतुर्थ जेपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा भी इसी नियमावली के तहत ली गयी और पीटी परीक्षा में आरक्षण दिया गया। लेकिन इसके बाद से जेपीएससी और जेएसएससी ने पीटी परीक्षा में आरक्षण का लाभ देना बंद कर दिया। प्रार्थियों की कहना था कि यह अधिसूचना आज भी लागू है इस कारण इसी नियमावली से परीक्षा होनी चाहिए। 
जबकि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से बताया गया कि वह कार्मिक विभाग की ओर से जारी नियमों और शर्तों के अनुसार परीक्षा लेता है।

इस परीक्षा में भी कार्मिक के नियमों का पालन किया गया है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गयी है। सभी चयनित लोगों ने योगदान भी दे दिया है। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि सरकार ने नीतिगत फैसला लेते हुए पीटी में आरक्षण का लाभ नहीं दिया है। अदालत नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी। 

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