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Jharkhand Live News – धनबाद: इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ कर यासर ने छोड़ दी थी इंजीनियरिंग, धमाकों की योजना वाली बैठकों में था शामिल

इंडियन मुजाहिद्दीन की गतिविधियों से जुड़ कर धनबाद के अम्मार यासर ने इंजीनियरिंग की किताबों से दूरी बना ली थी। आतंकी गतिविधियों में वह इतना मशगूल हो गया था कि उसे कॉलेज ने फाइनल सेमेस्टर एग्जाम से ठीक पहले बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कॉलेज ने आरोप लगाया था कि अम्मार दो साल से कॉलेज की कक्षाएं बंक कर रहा था। इसलिए उसे फाइनल एग्जाम में शामिल नहीं होने दिया जा सकता।

सात मई 2014 को जब गया के शेरघाटी स्थित उसके पैतृक गांव से अम्मार यासर की गिरफ्तारी हुई थी उस समय उसकी उम्र महज 22 साल थी। सात सालों से वह सलाखों के पीछे है। इसी बीच जयपुर सेशन कोर्ट ने उसे ताउम्र जेल में रहने की सजा सुना दी। बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना संजोए उसके रेलकर्मी पिता फिरोज खान कॉलेज की फीस भरते रहे और अम्मार अपने आतंकी साथियों के साथ अपने भविष्य को अलग ही मोड़ देने में लगा हुआ था। उसके मंसूबों को कोई नहीं समझ पाया।

आतंकी मारूफ की संगत ने दलदल में घसीटा

अम्मार यासर को आतंकवाद के दलदल में धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका मोहम्मद मारूफ ने निभाई। मारूफ पाकिस्तानी नागरिक व भारत में कई जगहों पर ब्लास्ट करने के आरोपी जिया-उर-रहमान उर्फ वकास के सीधे संपर्क में था। बता दें कि 22 मार्च 2014 को अजमेर स्टेशन से गिरफ्तार होने के बाद वकास ने ही राजस्थान के सभी आईएम माड्यूल का खुलासा किया था।

धमाकों की योजना वाली बैठकों में था शामिल

एटीएस ने जो आरोप पत्र समर्पित किया है उसमें बताया गया है कि जोधपुर का अशरफ अली खान निदा ए हक नामक पत्रिका का प्रकाशन करता था। मारूफ ने अम्मार को इस पत्रिका का ग्राहक बनवाया। जोधपुर का त्रिपोलिया बाजार स्थित अशरफ का हीरा गोल्ड ऑफिस दो साल तक आतंकियों का अड्डा बना रहा। मारूफ अम्मार कई बार वहां लेकर गया था। यहां धमाकों की योजना बनती थी। चार्जशीट में उल्लेख है कि दिसंबर 2012 में मारूफ और अम्मार यहां दो दिन रुके थे। कोर्ट में एटीएस ने इस तथ्य को साबित कर दिया।

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने यासर को लिया था हिरासत में

अम्मार यासर को सबसे पहले 24 मार्च 2014 को दिल्ली के शाहीन बाग इलाके के अबुल फजल इंक्लैब नामक अपार्टमेंट से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिरासत में लिया गया था। इससे पहले 23 मार्च 2014 को वकास की निशानदेही पर अम्मार के खास मारूफ सहित कई आतंकियों की गिरफ्तारी राजस्थान के जोधपुर व अन्य इलाकों से हुई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पूछताछ के बाद अम्मार को छोड़ दिया था। लेकिन उसके लैपटॉप में मिले सबूत और मारूफ से पूछताछ के आधार पर डेढ़ महीने बाद राजस्थान एटीएस ने फिर अम्मार को पकड़ लिया।

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