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Bihar Live News – CCTNS से जुड़ी बिहार पुलिस, बेहतर आउटपुट देने को लेकर जिला पुलिस के बीच हो रही प्रतिस्पर्धा

क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) भविष्य की पुलिसिंग का आधार है। इस कम्प्यूटर नेववर्क पर काम करने में जो जितना माहिर होगा उसे पुलिसिंग में उतनी ही महारथ हासिल होगी। वर्षों की मेहनत और जद्दोजहद के बाद आखिरकार बिहार पुलिस, सीसीटीनएस से बहुत हद तक जुड़ गई है। राज्य के 894 थानों में नेटवर्क काम करने लगा है। पर कौन सीसीटीनएस पर बेहतर कर रहा है और कहां सुधार की जरूरत है इसके लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया गया है। ऐसे में जिला पुलिस के बीच बेहतर काम करने को लेकर एक तरह से प्रतिस्पर्धा का माहौल है। 

छह बिंदुओं पर कार्य का मू्ल्यांकन
सीसीटीएनएस ने राज्य के अधिकांश थानों के जुड़ने के बाद जिला पुलिस के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह काम छह बिंदुओं पर होता है। इससे सीधे तौर पर जिले के एसपी को इससे जोड़ा गया है। सीसीटीनएस नेटवर्क से जुड़े थानों में हर एक प्राथमिकी और स्टेशन डायरी की ऑनलाइन इंट्री करनी है। यह अनिवार्य है। इसके अलावा केस डायरी, चार्जशीट और अरेस्ट मेमो की इंट्री भी डिजिटल फॉर्म में सीसीटीएनएस पोर्टल पर होनी है। इसके अलावा किस थाना में यह नेटवर्क कितनी देर ऑनलाइन रहा इसे भी देखा जा रहा है। यदि कोई थाना ऑनलाइन नहीं है तो नेटवर्क सिस्टम को कितनी देर में दुरुस्त किया गया, इन तमाम पहलुओं पर पुलिस के कामकाज का मूल्यांकन होता है। 

औरंगाबाद एसपी सुधीर पोरिका रहे पहले स्थान पर  
सीसीटीएनएस पर छह महीने के कामकाज को आधार बनाकर रैंकिंग जारी की जाती है। इसे सीधे तौर पर जिले के एसपी को जोड़ा गया है। दिसम्बर 2020 से 31 मई 2021 तक सीसीटीएनएस पर सबसे बेहतर परफार्मेंस में एसपी औरंगाबाद सुधीर कुमार पोरिका पहले स्थान रहे। वहीं दूसरे स्थान एसपी रेल, जमालपुर आमिर जावेद और तीसरा स्थान नालंदा एसपी हरि प्रसाथ एस को मिला। छह महीने के दौरान जो एसपी जिले में करीब पांच महीने तक रहते हैं तभी उनका परफार्मेंस सीसीटीएनएस के काम पर तय किया जाता है। वैसे जिला पुलिस के काम को देखा जाए तो भोजपुर को पहला जबकि औरंगाबाद और रेल जमालपुर को क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान मिला है। पटना पुलिस इस मामले में 34 वें स्थान पर है जबकि सबसे खराब परफार्मेंस बीते छह महीने के दौरान मुजफ्फरपुर पुलिस की रही।   

आईसीजेएस का हिस्सा है सीसीटीएनएस
आईसीजेएस एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके तहत न्यायालय, अभियोजन, पुलिस, जेल और एफएसएल को ई-नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाना है। परियोजना के पूरा होने के बाद क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की सभी संस्थाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म में एक-दूसरे से जुड़ जाएंगी। कागजात भी डिजिटल फार्म में एक से दूसरे संस्थाओं को भेजे जाएंगे। सीसीटीएनएस इसी का एक हिस्सा है जो पुलिस के कामकाज से संबंधित है। देश भर की पुलिस इस नेटवर्क के लिए एक-दूसरे का डाटा देख सकती है। 

सीसीटीएनएस पर किस जिले में कितना काम हो रहा है इसका मूल्यांकन समय-समय पर होता है। इसकी रिपोर्ट गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को भेजी जाती है। – डॉ. कमल किशोर सिंह, एडीजी अधुनिकीकरण सह सीसीटीएनएस के नोडल पदाधिकारी 

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