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Bihar Live News – नालंदा के बाजार में कम दाम वाले आगरा के आलू का कब्जा, मांग घटी तो किसानों की परेशानी बढ़ी 

आलू की खेती के लिए मशहूर नालंदा के बाजार पर आगरा (उत्तर प्रदेश) के आलू का कब्जा है। कीमत कम होने से इसकी खपत लोकल आलू से तीन गुणा ज्यादा है। मांग ज्यादा रहने से कारोबारी भी बाहर के आलू को ही बेचना चाहते हैं। 

बाजार में लोकल आलू है। लेकिन कीमत ज्यादा रहने से खरीदार पसंद नहीं कर रहे हैं। नुकसान जिले के किसानों को उठाना पड़ रहा है।  नालंदा जिला कोल्ड स्टोरेज ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह बताते हैं कि हर दिन चार से पांच ट्रक आगरा का आलू मंडी में आता है। एक ट्रक में पांच सौ पैकेट (एक पैकेट 50 किलो) यानी ढाई र्सौ ंक्वटल आलू रहता है। मांग अधिक रहने के कारण आसानी से बिक जाता है। जबकि, लोकल आलू की खपत औसतन एक से डेढ़ ट्रक मुश्किल से हो पाती है। दोनों के दाम में अंतर है। आगरा का आलू थोक भाव में 1050 रुपया क्विंटल तो लोकल का भाव 1250 रुपए क्विंटल है। प्रति किलो दो रुपए का अंतर सारा खेल बिगाड़ रहा है। बाजार में बंगाल का आलू भी है जो लोकल को टक्कर दे रहा है।

रहुई के किसान मनोहर प्रसाद, सूरजपुर के संतोष प्रसाद, डुमरावां के मनोज कुमार कहते हैं कि धान का बिचड़ा बोना है। आलू बेचकर बीज खरीदने की सोच रहे हैं। मजबूरी है कि बाजार में लोकल आलू की मांग काफी कम है। कीमत जितनी मिल रही है,उस दर पर बेचने में नुकसान उठाना पड़ेगा। इंतजार करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं दिख रहा है।

‘मिठका’ आलू लोगों को नहीं आता पसंद
थोक कारोबारी उमेश कुमार और निरंजन सिंह कहते हैं कि नालंदा के अधिकतर किसान पोखराज आलू का उत्पादन करते हैं। पैदावार बेहतर होती है, पोखराज आलू के स्वाद में मिठास की शिकायत है। इससे इसे कम पसंद किया जाता है। बाजार में ‘मिठका आलू’ के नाम से यह प्रचलित है। जबकि, यूपी के 3797 और ज्योति आलू सस्ता के साथ स्वाद में बेहतर है। हालांकि, आगरा का आलू सस्ता क्यों है, ये बताने में वे असमर्थ हैं।

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