65 हजार के 500 के पुराने नोट लेकर कलेक्टर के पास पहुंचा भिखारी, बदलवाने के लिए मदद की लगाई गुहार

पुराने नोटों के रद्द होने के पांच साल बाद, 65 साल का एक नेत्रहीन निराश्रित व्यक्ति को एक व्यक्ति द्वारा कलेक्ट्रेट में ले जाया गया था। चिन्नाकन्नू, वह व्यक्ति, जिसने तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में सड़कों पर जीवन व्यतीत किया था, हताशा के कगार पर था क्योंकि उसके अपने जीवन भर की कमाई को अमान्य घोषित कर दिया गया था।

श्री चिन्नाकन्नू ने रविवार तक नोटबंदी के बारे में कभी नहीं सुना था, जब उन्होंने ₹65,000 के कुल मुद्रा नोटों की खोज की, जिन्हें कहीं रखकर उनके बारे में भूल गए या उपयोग के लिए उन्हें समय पर नहीं ढूंढ पाए। उन्होंने वह पैसा कृष्णागिरी में पावक्कल पंचायत में अपने चिन्नागौंदनूर गांव में और उसके आसपास भिक्षा मांग कर कमाई थी।

चिन्नाकन्नू, जो लगभग 65 वर्ष के हैं और भिक्षा पर रहते हैं, ने पिछले सप्ताह ही एक मोची से नोटबंदी के बारे में सुना। मोची, आर कन्नैयन ने उन्हें कलेक्ट्रेट में मदद लेने की सलाह दी। वहां पहुंचने के बाद चिन्नाकन्नू से कहा गया कि वह इस मामले को जिला लीड बैंक मैनेजर से उठाएं।

चिन्नाकन्नू ने सोमवार को कहा कि, मैंने पिछले हफ्ते ही इस मुद्दे के बारे में सुना। मैंने तब कलेक्ट्रेट जाने की कोशिश की, लेकिन कंडक्टरों ने मेरे पहनावे के कारण मुझे अपनी बसों में नहीं चढ़ने दिया। अंत में, कन्नैयन ने मुझे आज यहां आने में मदद की।

जिला राजस्व अधिकारी एस राजेश्वरी, जिन्होंने एक शिकायत निवारण बैठक की अध्यक्षता की, ने इंडियन बैंक के प्रमुख जिला प्रबंधक आर महेंद्रन को इस मुद्दे को संभालने का निर्देश दिया। महेंद्रन ने कहा कि इसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संज्ञान में लाया जाएगा। चिन्नाकन्नू से पैसा नहीं लिया गया लेकिन अगले महीने से उन्हें पेंशन देने के निर्देश दिए गए।