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13 हज़ार करोड़ की लागत से बिहार के सप्लाई व डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर होगा आधुनिक , डीपीआर को मिली मंजूरी , किसानों को मिलेगी अधिक बजली

फिलहाल पूरा देश बिजली संकट से जूझ रहा है। राज्य में बिजली आपूर्ति के लिए ट्रेनों से कोयले को एक किराए से दूसरे राज्य पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। जिससे राज्य के लोगों को बिजली की समस्या कम हो इस बिजली संकट को देखते हुए कई राज्यों में घंटो तक बिजली गुल रही है। वैसे में यदि बिहार की बात करें तो बिहार में बिजली काफी बेहतर स्थिति में है। आने वाले महीनों में बिहार में बिजली की स्थिति और दुरुस्त हो जाएगी। बिहार के सप्लाई व डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर को पूर्ण रूप से मॉर्डनाइज किया जाएगा। जिससे राज्य में पहले के बिजली की स्थिति और भी बेहतर हो जाएगी।

किसानों को अलग से प्रदान होगी बिजली
राज्य के लोगों को 24 घंटे बिजली प्राप्त हो इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार एक साथ काम कर रही है। जिसको लेकर बिहार में बिजली व्यवस्था का आधुनिकीकरण को लेकर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द पूरे बिहार में 13000 करोड़ से अधिक रुपए खर्चा कर इस परियोजना का कार्य शुरू हो जाएगा। इस योजना के साथ ही साथ राज्य के सभी किसानों को किसानी करने के लिए अलग से बिजली प्रदान की जाएगी।

बनाये गए डीपीआर को केंद्र की मंजूरी
बता दें कि देशभर में बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए रिवैम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लॉन्च की गई है। इसमें देशभर में तीन लाख करोड़ खर्च होने हैं। योजना पर अमल करने के लिए पिछले दिनों केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने सूबे के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव के साथ बैठक की थी। उसी बैठक में बिहार ने लगभग 13 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम करने की जानकारी दी थी। उसी के आलोक में बिजली कंपनी ने डीपीआर बनाई, जिसकी मंजूरी हाल ही में राज्य कैबिनेट से मिली। अब उसी डीपीआर को केंद्र ने मंजूर कर लिया, जिसका आधिकारिक पत्र जल्द ही बिजली कंपनी को मिल जाएगा .

 

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