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राजधानी रांची के इस क्षेत्र में खुलेगा ट्रामा सेंटर, भीष्ण सड़क दुर्घटनाग्रस्त राहगीरों की बचाई जा सकेगी जान

रांची के राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर सड़क हादसे से घायलों की तुरंत इलाज नहीं हो पाती थी. खबर के मुताबिक़, एनएच 33 में बने चौड़े डिवाइडर को तोड़ते हुए ट्रक और कार में जोरदार टक्कर हुई. जहां कार में सवार तीन युवक बबलू, मनोज और कैलाश घायल हो गए. बता दें कि कार में सवार तीनों युवक रांची के रहने वाले हैं जो बुंडू से रांची जा रहे थे. इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुंडू में एनएच-33 पर ट्रॉमा सेंटर जल्द खुलेगा. इससे घायलों को तुरंत सेवा मिल सकेगी. इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ को प्रतिनियुक्त कर दिया गया है. शुरुआत में ट्रामा सेंटर में छह बेड की सुविधा उपलब्ध होगी. बाद में इसे बढ़ाकर 10 बेड का किया जायेगा. जल्द ही इसका विधिवत उद्घाटन होगा. फिलहाल पुरानी व्यवस्था के तहत मरीजों का इलाज हो रहा है. इसके पूर्ण रूप से चालू हो जाने पर गंभीर रूप से घायल यात्रियों का समय पर इलाज हो सकेगा और उनकी जान बच सकेगी. झारखंड में इसके अलावा गढ़वा, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, लोहरदगा व पूर्वी सिंहभूम जिले के हाइवे के किनारे ट्रॉमा सेंटर जल्द खोले जायेंगे.

घायलों को नहीं मिल पाता था समय पर इलाज
रांची से जमशेदपुर के बीच 100 किमी के दायरे में एनएच पर एक भी ट्रॉमा सेंटर नहीं है. इस मार्ग पर पड़नेवाले प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों व संसाधनों की भारी कमी है. इस कारण गंभीर रूप से घायलों का तत्काल उपचार नहीं हो पाता है.

124 ब्लैक स्पॉट हैं
राज्य में 240 दुर्घटना संभावित क्षेत्र में 124 ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किये गये हैं. इसमें से कई इस हाइवे पर मौजूद हैं. समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण दुर्घटना के शिकार वाहन चालकों की असमय मौत हो जाती है. यदि यह महत्वपूर्ण योजना धरातल पर उतरती है, तो एनएच 33 पर होनेवाली दुर्घटनाओं में घायल हुए लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा.

 हाइवे पर नहीं है एक भी ट्रामा सेंटर, अभी रिम्स रेफर होते हैं मरीज
हाइवे पर रोड एक्सीडेंट की अधिकता को देखते हुए यहां ट्रामा सेंटर खोले जा रहे हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से घायलों की मदद करने पर इनाम देने की घोषणा भी प्रभावी होगी. नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ट्रामा सेंटर खुलेगा.

108 एंबुलेंस सेवा देगी सपोर्ट
राज्य में हाइवे पर लोगों की जिंदगी महज 108 एंबुलेंस के भरोसे है. पांच साल के दौरान 1.46 लाख दुर्घटना हुए. इनमें 32 हजार मामले सिर में गंभीर चोट (हेड इंज्यूरी) के हैं. इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें समय पर समुचित इलाज मिल पाता, तो उनकी जिंदगी बचायी जा सकती थीं.

24 घंटे सेवा रहेगी उपलब्ध
सेंटर पूरी तरह से बन जाने के बाद यहां 24 घंटे सर्जरी, एनेस्थेसिया, फिजीशियन, आर्थोपेडिक्स, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के अलावा नर्सेज, टेक्नीशियन, आइसीयू के माहिर विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहेंगे.

 17 तरह की बड़ी आधुनिक मशीनें लगायी जाएगी
वेंटिलेटर सहित ट्रामा संबंधी इलाज की 17 तरह की बड़ी आधुनिक मशीनें लगायी जायेंगी. इसमें लैब इसीजी, प्लास्टर रूम, एक्सरे एवं सीटी स्कैन की सुविधा, जांच व सर्जरी इमरजेंसी केयर यूनिट के साथ माइनर व मेजर आॅपरेशन व सिटी स्कैन की सुविधा, बच्चे के लिए आइसीयू रूम, माइक्रो बायोलॉजी लैब के अलावा ब्लड बैंक, थ्री डी अल्ट्रा ट्रॉली बेस्ड सोनोग्राफी सहित कई अन्य ट्रामा सुविधाएं मौजूद होंगी.

 

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