बिहार में शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार सख्त, जानिए क्या बड़ा निर्णय लिया गया

शराबबंदी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को संवाद कक्ष में हुई सात घंटे की बैठक में सरकार ने इस बाबत सख्ती बढ़ाने के कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। यह फैसला लिया गया कि जिन राज्यों से बिहार में शराब की तस्करी हो रही है उनके रूट को चिह्नित कर उसे सील किया जाए। शराब की होम डिलेवरी वाले चैनल पर नजर रखने के लिए इंटेलिजेंस को नीचे के स्तर से दुरुस्त किया जाए। शराब की होम डिलेवरी के खिलाफ बड़ा अभियान आरंभ किया जाएगा। चौकीदार-दफादर से भी नियमित रूप से इंटेलिजेंस इनपुट लिया जाए। मुख्यालय के स्तर हर अगले दिन डीजीपी, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव व मद्य निषेध विभाग के अधिकारी यह समीक्षा करें कि शराबबंदी को लेकर जो निर्देश दिए गए हैं उसका अनुपालन हो रहा है या नहीं। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद व डीजीपी एसके सिंघल ने मुख्यमंत्री की मेराथन बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तार से जानकारी दी।

शराबबंदी को ले लापरवाह थानेदारों की खैर नहीं

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर भी विमर्श हुआ कि कई थाना क्षेत्रों में विगत तीन-चार वर्षों से शराबबंदी के मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिए कि ऐसे थानों को चिह्नित कर उनके थानेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

यह निर्देश गया कि अगर कोई सरकारी कर्मी शराब के धंधे में लिप्त पाया जाता है तो उसकी नौकरी जाएगी। मुख्यमंत्री ने तल्ख अंदाज में कहा कि किसी भी कीमत पर ऐसे कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जिलों के प्रभारी सचिव भी अब शराबबंदी की समीक्षा करेंगे

आम तौर पर जिलों के प्रभारी सचिव मुख्य रूप से संबंधित जिलों में चल रही विकास व सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करते हैैं। मुख्यमंत्री की बैठक में यह तय हुआ कि प्रभावी सचिव विकास योजनाओं के साथ-साथ शराबबंदी को लेकर हो रहे कार्यों की भी समीक्षा करेंगे। जिलों के प्रभारी मंत्री भी इस संबंध में सूचना लेंगे।

थाना क्षेत्र में शराब बरामद करती है तो थानेदार तुरंत निलंबित

मुख्यालय से गयी टीम अगर किसी थाना क्षेत्र में शराब की बरामदगी करती है तो संबंधित थाने के थानेदार को तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ विभाग के स्तर पर अन्य कार्रवाई होगी। थानेेदार की संलिप्तता स्पष्ट होने पर अगले दस वर्षों तक किसी थाने का जिम्मा उन्हें नहीं मिलेगा।