बिहार में लगेगा 250 मेगावाट के सोलर प्लांट, जानिए किन जिलों में लगेगा

प्रदेश में अगले एक से दो सालों में अच्छी खासी मात्रा में सौर ऊर्जा का उत्पादन संभव हो सकेगा। राज्य में बड़े स्तर के सोलर प्लांट लगाने की योजना का रास्ता साफ हो चुका। । दो एजेंसियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। एजेंसियों का प्रस्ताव बिहार विद्युत विनियामक आयोग को भेज दिया गया है। आयोग की मंजूरी के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में सोलर बिजली घर लगाने की कार्रवाई शुरू होगी।

इस दर पर बिजली देगा एसजेवीएन।

सोलर बिजली घर में 250 मेगावाट में से 200 मेगावाट का उत्पादन हिमाचल सरकार और केंद्र सरकार का संयुक्त उपक्रम एसजेवीएन करेगा। बक्सर के चौसा में 1320 मेगावाट की थर्मल इकाई पर यही एजेंसी काम कर रही है। एसजेवीएन ने मात्र 3.11 रुपए प्रति यूनिट सोलर बिजली देने का दर दिया है। एक निजी कंपनी अवादा पावर ने 100 मेगावाट सोलर बिजली घर लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसने 3.20 रुपए प्रति यूनिट का प्रस्ताव ब्रेडा को दिया है। ब्रेडा की कोशिश है कि अवादा पावर भी एसजेवीएन की तरह ही 3.11 रुपए प्रति यूनिट की दर से ही सोलर बिजली घर लगाए। हालांकि इस पर अंतिम फैसला विनियामक आयोग के स्तर पर ही होगा।

इन जिलों में जमीन की गई है चिन्हित।

एक मेगावाट सोलर बिजली के लिए औसतन चार-पांच एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से 250 मेगावाट के लिए 1000-1250 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। चूंकि एक जगह इतनी जमीन मिलने में परेशानी हो सकती है। इसे देखते हुए ब्रेडा ने एजेंसियों को कहा है कि वह कम से कम 50 मेगावाट सोलर बिजली उत्पादन कर सकता है। इतनी जमीन गया, जमुई, गया, औरंगाबाद, आदि इलाके में चिह्नित की गई है। बता दें कि काम शुरू करने के 18 महीने में सोलर बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। उम्मीद है कि मार्च 2023 तक बिहार में सोलर बिजली का उत्पादन शुरू हो सकता है।