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बिहार, झारखण्ड और बंगाल के पैसेंजर ट्रेनों में होगी मेट्रो जैसी सुविधाएं, जानिए क्या होगा खास

झारखंड, बंगाल और बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। इन क्षेत्रों के एक बड़े हिस्से में पूर्व रेलवे का आसनसोल रेल मंडल रेल गाड़ियों का परिचालन करता है। पश्चिम बंगाल के आसनसोल से लेकर बिहार से झाझा तक और झारखंड के प्रधानखांटा व गिरिडीह तक आसनसोल रेल मंडल का इलाका है। आसनसोल रेल मंडल ने मेट्रो जैसी सुविधा वाली मेमू ट्रेनों का परिचालन करने की तैयारी शुरू कर दी है। यात्रियों को सफर के दाैरान जहां जहां लोकल ट्रेन (मेमू) चलती है, वहां के यात्रियों को जल्द ही इसमें मेट्रो का मजा मिलेगा।

मेट्रो की तरह बनाई गई है मेमू की बोगियां

दरअसल, इन ट्रेन की बोगियां मेट्रो की तरह बनाई गई हैं। पहली रैक एक सप्ताह पहले आसनसोल स्टेशन पहुंच गई है। ट्रायल शुरू हो गया है। सब ठीक रहा तो दो से तीन महीने में इसी किराये में मेट्रो का आनंद मिलेगा। आसनसोल रेल मंडल से जो शुरुआत हो रही है, सफल होने पर देश के अन्य रेल मंडलों की लोकल ट्रेन में भी यह व्यवस्था होगी। डीआरएम परमानंद शर्मा ने बताया कि जो 12 बोगी की रैक रेलवे ने भेजी है, उसकी गति क्षमता सामान्य ट्रेन से ज्यादा है। सवारियां भी 30 फीसद अधिक ले चलने की क्षमता है। बोगियों में कई अन्य सुविधाएं भी हैं। नई रैक कपूरथला वर्कशाप में तैयार हो रही हैं। ट्रायल सफल होने पर और रैक बनाई जाएंगी।

सीसीटीवी कैमरे की होगी सुविधा

सामान्य लोकल ट्रेन से यह काफी भिन्न होगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें जगह जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। खड़े होकर सफर करने वाले यात्रियों को और ज्यादा जगह दी गई है। बैठने की व्यवस्था ज्यादा सुव्यवस्थित है। दरवाजे आटोमेटिक होंगे। इसकी न्यूनतम व अधिकतम गति एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेन की तरह होगी। इसे थ्री फेज मोटर और स्पेशल ब्रेक से लैस किया गया है। ताकि जरूरत पडऩे पर ड्राइवर ट्रेन की गति तत्काल कम कर सके। फिलहाल जो लोकल ट्रेनें चल रहीं हैं, उनमें ड्राइवर को खड़े होकर गाड़ी चलानी पड़ती है, इसमें उनके बैठने की व्यवस्था है। ड्राइवर का केबिन पूरी तरह वातानुकूलित व अत्याधुनिक है।

सूचना मिलेगी, ट्रेन कहां पहुंची, अगला स्टेशन कौन

इस ट्रेन की बोगियों में मेट्रो की तरह डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगे हैं। जो ट्रेन की वर्तमान स्थिति को बताएंगे। इनमें यात्री यह देख पाएंगे कि ट्रेन कहां से कहां जा रही है, किस स्टेशन से निकली है, अगला स्टेशन कौन सा है। ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही दरवाजे खुद खुल जाएंगे, चलने से तुरंत पहले अपने आप बंद होंगे।

बायो टायलेट की भी है सुविधा

अभी जो लोकल ट्रेन चल रही हैं उनमें टायलेट नहीं हैं। इस नई लोकल ट्रेन में अत्याधुनिक बायो टायलेट है। नल व बेसिन भी। बकौल डीआरएम ट्रायल पूरा होने के बाद आसनसोल से धनबाद, बद्र्धमान, नेहाटी, जसीडीह, झाझा, अंडाल के रूट पर चल रही लोकल ट्रेनों की जगह इस रैक को लगाया जाएगा। हालांकि एक ही रैक है, इसलिए जिस रूट पर बेहतर प्रतीत होगा, वहां से इसे शुरू करेंगे।

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