दिसंबर तक बिहार के सभी जिलों में बनकर तैयार हो जायेगा ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक

राज्य में अब दिसंबर तक ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक होगा. औरंगाबाद व पटना के तर्ज पर राज्य के अन्य जिलों में स्वचालित टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण होगा. इसके लिए राज्य के 20 बड़े जिलों को 75 -75 लाख रुपये, जबकि छोटे जिलों को 50 -50 लाख भेज दिये गये हैं.

इस ट्रैक के बन जाने से आने वाले दिनों में ड्राइविंग की परीक्षा मैनुअल के बजाय स्मार्ट तकनीक से होगी. ट्रैक बन जाने के बाद बिना परीक्षा दिये ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन पायेगा. दूसरी ओर जिन जिलों में अभी किसी कारण से काम में कोताही हो रही है. वैसे जिलों के डीएम से सितंबर अंत में पूरी रिपोर्ट विभाग ने मांगी है.

अभी इस तरह हो रही है जांच, जिससे नहीं कम हो रही हैं सड़क दुर्घटनाएं

राज्य में ऑनलाइन आवेदन के बाद ड्राइविंग जांच की परीक्षा मैनुअल तरीके से ही होती है. यह तरीका पूरी तरह पारदर्शी और उपयोगी नहीं है. दलालों की मिलीभगत से आवेदकों को घर बैठे लाइसेंस मिल जाता है.इसके लिए जिला परिवहन कार्यालय में रेट तय है और पैसा देने पर लाइसेंस आराम से मिल जाता है.

काल्पनिक तस्वीर

ऐसा नाम का परीक्षा पास करने वाले ही सड़क पर विफल साबित होते हैं, जिसका परिणाम है कि बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है.आंकड़ों के अनुसार ड्राइविंग टेस्ट की परीक्षा में 99 फीसदी से अधिक लोग पास हो जाते हैं,वहीं सड़क दुर्घटना में चालकों की लापरवाही 80 फीसदी से अधिक होती है. इससे स्पष्ट है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के क्रम में ड्राइविंग जांच की प्रक्रिया संदेहास्पद है.

फुलवारी में तैयार हो रहा ट्रैक

पटना के फुलवारी में भी ऐसा ट्रैक लगभग तैयार हो गया है, जबकि मुजफ्फरपुर में जगह चिह्नित की जा चुकी है. बाकी 35 जिलों में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की जमीन लीज पर ली जायेगी. ऑटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण किया जायेगा. इस तरह सभी जिले में ट्रैक बनने के बाद मैनुअल पद्धति से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस पर रोक लग जायेगी.

ऐसे होती है जांच

औरंगाबाद में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का निर्माण हुआ है. ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन देने वालों को इसी ट्रैक की परीक्षा से गुजरना पड़ता है. स्मार्ट फोन के माध्यम से चालकों की दक्षता मापी जाती है. साथ ही ट्रैक पर लगे कैमरे चालकों की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखते हैं.

थोड़ी- सी गलती होने पर उनका अंक कम हो जाता है. अंक कम मिले तो फिर उन्हें लाइसेंस जारी नहीं किया जाता. यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है, जिसमें किसी व्यक्ति के द्वारा दाएं- बाएं करने की कोई गुंजाइश नहीं होती है.