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बिहार के लोग अब दूसरे राज्य का नहीं अपने इस ज़िला का सेब खा सकेगे, जानिए विस्तार से

बिहार के लोगों को अब सेब खाने के लिए कश्‍मीर और हिमाचल प्रदेश का मुंह नहीं ताकना होगा। अगर गोपालगंज में कृषि विभाग की योजना सफल रही तो बिहारी लोग अपनी ही जमीन पर उपजाया गया सेब खा सकेंगे। गोपालगंज में जल्‍द ही सेब की खेती का ट्रायल शुरू होने वाला है। इसके लिए उचकागांव प्रखंड के चार किसानों को हिमाचल प्रदेश में पैदा होने वाली सेब की उन्‍नत किस्‍म हरमन-99 की खेती के लिए चुना गया है। इन किसानों को ट्रायल के लिए पौधे उपलब्‍ध करा दिए गए हैं। अहमदाबाद के नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान के प्रशिक्षक डा. पार्थ कुमार दवे ने बताया कि गोपालगंज जिले की मिट्टी सेब की खेती के लिए मुफीद है। बस जरूरत है किसान सेब की खेती के लिए आगे बढ़ें और पुरानी परंपरागत खेती से अलग हटकर कुछ नया करने के लिए सेब की खेती करें। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

मई-जून तक पौधाें में आने लगेंगे पत्‍ते

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उन्नत किस्म की हरमन-99 प्रजाति से तैयार सेब के पौधों को ट्रायल के रूप में जिले के प्रत्येक प्रखंड के चार किसानों को उपलब्ध कराया गया है। सभी किसान सेब के उपलब्ध कराए गए पौधे की देखभाल अच्छी तरीके से करें तो मई और जून महीने तक इन पौधों में पत्ते आने शुरू हो जाएंगे। 2 वर्षो के अंदर इसमें फूल भी देने शुरू हो जाएंगे। किसान 3 वर्षों के अंदर सेब की अच्छी फसल प्राप्त कर पैदावार के साथ-साथ अपनी आमदनी भी बढ़ा सकेंगे।

जलजमाव से पौधों को बचाना ही होगी चुनौती

किसानों को सेब के तैयार पौधों को जलजमाव से बचाना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। जिसे किसान पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएं तो उन्हें इसका अच्छा लाभ मिलेगा और धीरे-धीरे गोपालगंज जिला भी सेब की खेती के लिए अपनी पहचान बना सकेगा। उन्‍होंने कहा कि ट्रायल सफल रहने पर इसका विस्‍तार किया जाएगा।

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