बिहार के ये दो एनएच 10 साल में भी नहीं हुआ है पूरा, जानिए पूरा डिटेल

छपरा-हाजीपुर सड़क यानी पुराना एनएच-19 और नया एनएच-31 का निर्माण कब पूरा होगा यह एनएचएआई को भी पता नहीं। यह ऐसी सड़क है, जिसके निर्माण को कंपनी तय हुए एक दशक बीत गए पर अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया। कंपनी कह रही कि इस प्रोजेक्ट के लिए बैंकों से पैसे नहीं मिल रहे। तय अवधि में अगर कोई आधारभूत संरचना पूरी नहीं होती है तो उसे रेग्यूलेट करने वाली संस्था संबंधित कंपनी से काम लेकर दूसरी एजेंसी को दे देती है पर इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया है।

जनवरी 2011 में तय हुई थी निर्माण कंपनी

प्रोजेक्ट के लिए निर्माण एजेंसी को 27 जनवरी 2011 में काम मिला था। कंपनी को तीन वर्षो में काम पूरा करना था। पर बीच में कंपनी ने काम इस वजह से रोक दिया कि उसके पास पैसे नहीं थे। वह नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चली गई। हाल में बैंकों ने निर्माण एजेेंसी को 170 करोड़ रुपये दिए हैं। वहीं 170 करोड़ रुपये निर्माण एजेंसी को खुद लगाना है। ऐसे में उम्मीद है कि काम थोड़ा आगे बढ़ेगा।

66.74 किमी लंबी सड़क में मात्र 49.42 किमी सड़क ही बन पाई

सड़क की कुल लंबाई 66.74 किमी है। इसमें केवल 49.42 किमी का निर्माण ही पूरा हो पाया है। कहा जा रहा कि निर्माण एजेंसी ने उपलब्ध राशि का 92.35 प्रतिशत खर्च कर दिया है।

तीन गांवों में रि-एलायनमेंट का हो रहा विरोध

इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के क्रम में आई समस्या को ध्यान में रख इसका रि-एलायनमेंट किया गया था। इसमें हेवंतपुर, मानपुर तथा मनोहरपुर गांव हैं। इसमें 1.1 किमी का हिस्सा इस तरह का है जहां लोगों को नए एलायनमेंट पर विरोध है। लोग जमीन का मुआवजा नहीं ले रहे।

सुमेरपट्टी और शीतलपुर में एप्रोच ब्रिज के लिए पक्का निर्माण को तोड़ना है

निर्माण में एक समस्या यह भी है कि एलायनमेंट के तहत बनने वाले माही ब्रिज के निर्माण को ले 59 पक्की संरचनाओं को तोड़ा जाना है। सुमेरपट्टïी और शीतलपुर में अब तक 40 संरचनाओं को तोड़ा जाना है। दस संरचनाओं को भी जल्द तोडऩे की बात है पर नौ संरचनाएं ऐसी हैं जिन्हें तोड़ने और फिर उसके मुआवजे का अभी तक इस्टीमेट नहीं बन पाया है।