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बिहार के इस नए रेलवे लाइन पर जल्द ट्रेनें चलेंगी : दरभंगा, सहरसा सहित कई शहरों को होगा फ़ायदा

अब नये साल के मार्च महीने में सहरसा से सुपौल, निर्मली, झंझारपुर होकर दरभंगा तक रेल संपर्क बहाल करने की रेलवे ने योजना बनाई है। पहले वर्ष 2022 के अप्रैल या मई माह में इस नवनिर्मित रेलखंड को चालू करने की योजना थी। पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक अनुपम शर्मा ने मुख्यालय हाजीपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समस्तीपुर मंडल के डीआरएम और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करते ब्रॉडगेज से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समय सीमा तय कर दी है।

समस्तीपुर मंडल के डीआरएम आलोक अग्रवाल ने कहा कि महाप्रबंधक ने निर्माण परियोजनाओं की शुक्रवार को समीक्षा कर छोटी-छोटी समस्याओं को दूर कर दिया है। उन्होंने तेजी से आमान परिवर्तन कार्यों के निपटारे का निर्देश दिया है। डीआरएम ने कहा कि 1471 करोड़ की लागत से चल रहे सहरसा-फारबिसगंज-सकरी-निर्मली-लौकहा (206) किलोमीटर आमान परिवर्तन कार्य में फिलहाल सहरसा से सुपौल, सरायगढ़ होते आसनपुर कुपहा और राघोपुर तक पैसेंजर ट्रेनें चल रही है।

राघोपुर से ललितग्राम तक सीआरएस निरीक्षण हो चुका है और रेलवे बोर्ड से मिले दिशा निर्देश मुताबिक जल्द ही इस रेलखंड पर ट्रेन परिचालन शुरू किया जाएगा। 206 किमी वाले रेलखंड का हिस्सा आसनपुर कुपहा-निर्मली नवनिर्मित रेलखंड पर बचे पुल और अन्य काम को एक महीने के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद जनवरी अंतिम तक सीआरएस निरीक्षण कराते हुए मार्च 2022 तक इस सेक्शन को चालू करने की योजना है। इस सेक्शन के चालू होते सहरसा से सुपौल, सरायगढ़, निर्मली, तमुरिया, झंझारपुर होते दरभंगा तक ट्रेन सेवा बहाल हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि सहरसा से सुपौल, झंझारपुर होकर दरभंगा तक ट्रेन परिचालन बहाल होने के बाद कोसी और मिथिलांचल का सफर कम समय और खर्चे में तय होगा। लाखों की आबादी को फायदा होगा।

फिर लौकहा ब्रॉडगेज के काम पर रहेगा फोकस

डीआरएम ने कहा कि सहरसा से झंझारपुर होकर दरभंगा तक ट्रेन सेवा बहाल करने के बाद लौकहा ब्रॉडगेज के काम को तेजी से पूरा कराने पर फोकस रहेगा। आमान परिवर्तन कार्यों को पूरा कराने के लिए प्राथमिकता दिया जा रहा है।

अप्रैल या मई में फारबिसगंज तक लाइन चालू करने की योजना

अगले साल के अप्रैल या मई माह में फारबिसगंज तक लाइन चालू करने की रेल प्रशासन की योजना है। डीआरएम ने कहा कि ललितग्राम से फारबिसगंज तक आमान परिवर्तन कार्य चल रहा है। अप्रैल या मई माह में इसे चालू करने की योजना है। उल्लेखनीय है कि ललितग्राम से नरपतगंज तक 12 किमी की दूरी में ट्रैक लिंकिंग का काम चल रहा है। वल निर्माण विभाग की अगले माह इस रेलखंड पर इंजन दौड़ाने की योजना है।

बड़हरा कोठी-बिहारीगंज ट्रैक लिंकिंग जनवरी अंतिम तक

बड़हरा कोठी-बिहारीगंज ट्रैक लिंकिंग का काम जनवरी अंतिम तक पूरा करने की योजना है। डीआरएम ने कहा कि जनवरी अंतिम तक बड़हरा कोठी-बिहारीगंज ट्रैक लिंकिंग का काम पूरा करते सीआरएस निरीक्षण कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी-रक्सौल रेलखंड को विद्युतीकृत करते 10 दिसंबर को पहली बार मालगाड़ी विद्युत इंजन से चलाई गई। अब इस रेलखंड पर बिना इंजन बदले ट्रेनों की आवाजाही होगी। डेमू के साथ मेमू ट्रेन भी चल सकेगी।

फंड की नहीं है कमी

डीआरएम ने कहा कि आमान परिवर्तन कार्य के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। चल रहे आमान परिवर्तन कार्यों को पूरा करने के लिए सरकार ने पर्याप्त राशि दे दी है।

महत्वपूर्ण रेलखंड का कई बार बढ़ चुका है लक्ष्य

सहरसा-फारबिसगंज-सकरी-निर्मली-लौकहा 206 किमी महत्वपूर्ण रेलखंड पर आमान परिवर्तन कार्य पूरा करने के लिए कई बार समय अवधि बढ़ चुकी है। कभी काम में लेटलतीफी तो कबि राशि की कमी या कोरोना व बाढ़ बरसात की मार आमान परिवर्तन कार्य को लटकाती रही। इस साल भी कभी जुलाई तो कभी अक्टूबर तक झंझारपुर होकर दरभंगा तक ट्रेन सेवा बहाल होने की बात कही जाती रही। अब फिर से कवायद तेज होने से आवागमन से वंचित इलाकों में ट्रेन सेवा बहाल होने की उम्मीद जगी है। बड़ी बात यह कि फारबिसगंज तक ट्रेन सेवा बहाल होने के बाद नेपाल बॉर्डर के करीब पहुंच जाएंगे। पूर्वोत्तर के इलाके से अररिया, जोगबनी के रास्ते जुड़ जाएंगे।

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