बिना कोचिंग, ममता यादव बनी यूपीएससी की पांचवी टॉपर, पढ़िए ममता यादव के संघर्ष की कहानी

यूपीएससी एक ऐसा सपना है जिसे पूरा करने के लिए हर साल लाखों बच्चे मेहनत करते हैं और इनमें से कुछ बच्चे सफल भी होते हैं. हर साल बड़ी संख्या में इस परीक्षा को पास करने के लिए बच्चे संघर्ष करते हैं और कुछ बच्चे पहले प्रयास में इस परीक्षा को पास कर लेते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी बच्चे होते हैं जो कई साल संघर्ष करते रहते हैं लेकिन असफल होते हैं, लेकिन फिर भी वह प्रयास करना नहीं छोड़ते और तब तक कोशिश करते हैं जब तक वह सफल नहीं हो जाते.

इस साल कई युवाओ ने बढ़ाया देश का मान –

इस साल में यूपीएससी के रिजल्ट का लोगों को बेसब्री से इंतजार था, शुक्रवार की रात को upsc की रिजल्ट घोषित की गई इसके बाद कई सारी युवा खुशी से झूम उठे. इस परीक्षा में कई ऐसे युवा भी सफल हुए हैं जो काफी संघर्ष किए उसके बाद जाकर सफल हुए.परीक्षा में कुल 761 उम्मीदवार पास हुए हैं, जिनमें 545 पुरुष और 216 महिलाएं हैं. सबसे बड़ी बात है कि इस साल यूपीएससी में लड़कियों ने बाजी मारी है.टॉप फाइव में लड़कियों ने अपनी जगह बनाई है.

ममता ने बिना किसी कोचिंग और गाइड के क्रैक किया यूपीएससी की परीक्षा –

दिल्ली की ममता जिन्होंने यूपीएससी क्रैक किया उनकी उम्र अभी 24 साल है. अपने गांव में ममता आईएएस बनने वाली पहली महिला बन गई है.

ममता ने upsc मे पांचवे स्थान हासिल किया है. ममता ने यूपीएससी की परीक्षा में पांचवीं रैंक हासिल की है. बता दें कि 2020 में भी ममता ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी. उस वक्त उन्होंने 556 रैंक हासिल की थी. सिलेक्ट होने के बाद वह भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा के लिए प्रशिक्षण लेने लगीं. लेकिन ममता इस बात से संतुष्ट नहीं थे इसलिए उन्होंने फिर से तैयारी की और फिर से एग्जाम दिया और सफलता हासिल की.

माता-पिता को है ममता पर नाज- ममता के पिता एक निजी कंपनी में काम करते हैं और उनकी माँ सरोज एक गृहिणी है. ममता की पढ़ाई लिखाई दिल्ली से हुई और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया.ममता के माता पिता को अपनी बेटी की सफलता पर नाज है.ममता की माता का कहना है कि मुझे यकीन नहीं था कि मेरी बेटी इतनी आगे जाएगी लेकिन इसने हमारे सपने को पूरा किया और हमारा मान बढ़ाया है.