बिकने को पूरी तरह से तैयार है “एयर इंडिया।” टाटा या स्पाइसजेट के हाथ में जा सकती है कमान

टाटा संस और स्पाइसजेट के अध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में एक समूह ने बिडिंग जमा करने के आखिरी दिन बुधवार को एयर इंडिया के लिए वित्तीय पेशकश की। टाटा संस ने अपनी 100% शाखा टैलेस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से पेशकश की, जबकि सिंह ने कुछ निवेश फंडों के साथ अपनी व्यक्तिगत क्षमता में वित्तीय बोलियां लगाईं।

सरकार को उम्मीद है कि इस साल एयर इंडिया की बिक्री पूरी हो जाएगी, जो देश के निजीकरण कार्यक्रम में एक बड़ा मील का पत्थर है। नकदी की कमी वाली एयरलाइन को बेचने में लगभग 20 साल लग गए हैं। केंद्र जल्द ही एयरलाइन की बिक्री के लिए एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित करेगा। जो कोई भी न्यूनतम मूल्य से अधिक बोली लगाता है, एयर इंडिया की कमान उसके हाथों में होगी। बिल्डिंग की प्रक्रिया को महीने के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

इंडस्ट्री के जानकारों की माने तो एयर इंडिया के टाटा संस के कंट्रोल में जाने के ज्यादा चांसेस है। एयर इंडिया की स्थापना 1932 में टाटा ग्रुप के द्वारा ही की गई थी। बाद में 1953 में इसे नेशनलाइज कर दिया गया था।

एयर इंडिया पर 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से 22,000 करोड़ रुपये एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को भी ट्रांसफर किए जाएंगे। सरकार एयरलाइन और इसकी कम लागत वाली शाखा एयर इंडिया एक्सप्रेस में 100% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।

एयरलाइन के विनिवेश से सफल बोली लगाने वाली कंपनी को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट और विदेशों में हवाई अड्डों पर 900 स्लॉट का नियंत्रण मिलने की उम्मीद है।