पिता थे बस के कंडक्टर। पहले प्रयास में ही बेटी बन गई आईपीएस ऑफिसर। जानिए इनकी प्रेरणादायक कहानी

महिलाओं के पास पढ़ने के बहुत सीमित अवसर होते हैं और उन्हें हमेशा पुरुषों से कमतर आंका जाता रहा है। उन्हें वास्तव में वह करने की स्वतंत्रता नहीं होती जो एक पुरुष को होती है इसलिए वे गृहिणी बन जाती हैं। हालांकि, पुरुष प्रधान समाज में, कुछ महिलाएं जीवन में सफल होने के लिए सभी बाधाओं का सामना कर रही हैं।

ऐसी ही एक महिला हैं शालिनी अग्निहोत्री जिनके पिता बस कंडक्टर का काम करते थे और माता गृहणी थी। सारी परिस्थितियों से लड़कर वह आईएएस ऑफिसर बनी। और इतना ही नहीं हुआ वह 65 वीं बैच की बेस्ट ऑलराउंडर ट्रेनिंग ही चुनी गईं।

शालिनी का जन्म हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के थाथल गांव में हुआ था। उनके पिता रमेश एक बस कंडक्टर हैं, और उनकी मां शुभलता, एक गृहिणी, ने हमेशा उनका और उनके दो भाई-बहनों का समर्थन किया। वह बताती हैं कि वे ऐसे बैकग्राउंड से आती हैं जहां लोगों ने बहुत फॉर्मल एजुकेशन हि ली हुई है। उनके परिवार और रिश्तेदार में कोई ज्यादा शिक्षित नहीं है। इसे देखकर कई बार लगता था शायद यह मेरा सपना मेरी पहुंच से बाहर है।

शालिनी ने अपनी स्कूली शिक्षा डीएवी स्कूल, धर्मशाला से की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर से स्नातक किया है। अपने बचपन की एक घटना के बारे में बताते हुए शालिनी ने कहा कि एक बार जब वह अपनी मां के साथ एक बस में यात्रा कर रही थी, तो उनके बगल में खड़ा एक अज्ञात व्यक्ति उस सीट पर हेडरेस्ट पकड़े हुए था जहां वे बैठे थे। उनकी माता और शालिनी ने उस व्यक्ति से हाथ उठाने को कहा। तो उस व्यक्ति ने कहा कि तुम कहीं की कलेक्टर हो क्या जो तुम्हारा ऑर्डर मानू।

शालिनी को उस वक्त डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन उससे अंदाजा हो गया था कि यह जरूर कोई व्यक्ति होकर जिसका आर्डर सब मानते होंगे। उसी दिन से उन्होंने प्रण किया कि मैं भी यह अफसर बनने की तैयारी करूंगी।

वह बताती हैं कि इंटरनेट ने मेरी तैयारी में बहुत मदद की है। रानी गांव में रहकर इंटरनेट के माध्यम से काफी ऑनलाइन पढ़ाई की, अलग-अलग टॉपिक पर रिसर्च किया। बाकी अभ्यर्थियों की तरह मैंने भी अपना वक्त मैगजीन और न्यूज़पेपर को दिया है।

बता दें कि शालिनी को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर महिला अधिकारी प्रशिक्षु और बाहरी विषयों में सर्वश्रेष्ठ महिला अधिकारी प्रशिक्षु होने का पुरस्कार भी मिला। उन्हें जांच के लिए एक ट्रॉफी और सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर अब तक के सर्वश्रेष्ठ निबंध लेखन के लिए एक ट्रॉफी भी मिली। पहले वह शिमला में सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थीं, शालिनी को अब कुल्लू जिले, हिमाचल प्रदेश में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात किया गया है।