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पिता के मृत्यु के बाद किया कई संघर्ष, खेती कर पाला परिवार का पेट, ऐसे बना एक लड़का IAS ऑफिसर

कहते हैं जब आप पूरी शिद्दत से कोशिश करते हैं कुछ करने की तो वह कोशिश जरूर साकार होती है. विद्वानों ने ऐसा कहा है कि कभी हार कर अपने सपने को अधूरा मत छोड़ो एक और कोशिश करो क्या पता आपका सापना पूरा हो जाए.यह सक्सेस स्टोरी है K Elambahavath की. के एलमबहावत साल 1982 में तमिलनाडु के जिले थनजावूर के छोटे से गांव चोलागनगूडिक्कडू में जन्में थे. पिता ग्राम प्रशासनिक अधिकारी, माँ किसान और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती थी. एलमबहावत का सामान्य बचपन बीता.

सिर से पिता का साया उठा- उन्होंने अपना ज्यादा समय अपनी बहनों के साथ खेलने में और मां के खेतों में मदद करने में बिताया.एलमबहावत के पिता गांव के पहले ग्रेजुएट थे. इनके परिवार ने शिक्षा को बहुत महत्व दिया लेकिन 1997 में इनके पिता की मौत हो गई . जिस समय एलंबहावत के पिता की मृत्यु हुई उस समय वह 12वीं क्लास में थे और तब उनके जिंदगी में आर्थिक तंगी आ गई जिसके कारण उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी.

कृषि से परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश–

जब एलंबहावत की पढ़ाई बीच में ही छूट गई तब वह यह नहीं जानते थे कि वह आगे ग्रेजुएट कर पाएंगे कि नहीं तब उनके लिए क्या सपना बहुत दूर का था कि वह कभी आईएएस ऑफिसर भी बन सकते हैं. एलंबहावत जब 24 साल के हो गए तब तक उन्हें यह भी पता नहीं था कि सिविल सर्विसेज क्या होता है. वह अपना अधिकतर समय अपनी मां के साथ खेतों में काम करने बिताते थे. एलंबहावत ने CGL के पोस्ट के लिए अप्लाई किया लेकिन उन्हें वहां कोई सफलता हाथ नहीं लगी.

हताशा के बाद IAS अधिकारी बनने का फैसला-

एलंबहावत के जिंदगी में कई सारी मुश्किलें आई और वह लगातार मुश्किलों से लड़ते रहे. वह 9 साल तक कई प्रकार के सरकारी नौकरियों का फॉर्म भरे थे लेकिन उन्हें किसी में सफलता नहीं मिली अंत में उन्होंने सोचा मुझे आईएएस ऑफिसर ही बनना है. खास बात यह थी कि कई सारे विद्यार्थी किसी से प्रेरित होकर आईएएस ऑफिसर का सपना चुनते हैं लेकिन आए एलंबहावत ने हताश होकर यह लक्ष्य चुने.

12वीं में ही पढ़ाई छूटने के बाद एलमबहावत ने डिस्टेंस से पढ़ाई की. अदरक यूनिवर्सिटी हिस्ट्री ऑनर्स करने के बाद उन्होंने अपने दम पर अपनी पढ़ाई जारी रखें. उन्होंने यूपीएससी के लिए कोई कोचिंग सेंटर ज्वाइन नहीं किया क्योंकि उनके पास ना तो इतने पैसे थे ना ही सुविधा

सिविल सर्विस के लिए कोई मार्गदर्शन की सुविधा नहीं

एलंबहावत के गांव के आसपास कोई सिविल सर्विसेज के लिए कोचिंग नहीं थे. उन्होंने बिना कोचिंग के ही पढ़ाई किया और वह ज्यादा टाइम लाइब्रेरी में पढ़ने में ही बिताते थे. उनके आईएएस की तैयारी में उनके हेड मास्टर के साथ-साथ कई दोस्तों ने भी मदद की.

5 बार MAINS और तीन बार इंटरव्यू राउंड में फेल

महावत यूपीएससी की परीक्षा में फेल होने के बाद स्टेट गवर्नमेंट ग्रेड 1 सिविल ज्वाइन कर लिए. उन्हें डीएसपी का पोस्ट मिल गया. लेकिन उनके मन में जो आईएएस ऑफिसर बनने का सपना था वह उसका पीछा नहीं छोड़ पा रहा था. उन्होंने नौकरी के दौरान परीक्षा की तैयारी की. एलंबहावत पांच बार यूपीएससी की मेंस में फेल हुए और साथ ही साथ तीन बार इंटरव्यू राउंड में भी एलंबहावत को सफलता ही हाथ लगी. उन्होंने IAS के लिए 2015 में अपना लास्ट प्रयास किया. तब उसने IAS state cadre में ऑल इंडिया 117वीं रैंक पाई.

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