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धनबाद के छात्र ने बनाई एक ऐसी डिवाइस: जो सुन-बोल नहीं पाते, उनके मस्तिष्क तक पहुंचाएगी आवाज

आपके साथ ऐसा होता की कान कमजाेर हाे गए और ईयरफाेन लगाने के बाद भी कम सुनाई देता हैं ताे ऐसे लोगों को अब चिंता करने की बात नहीं। धनबाद के साैरभ की टीम ने दांताें में लगाई जानेवाली एक खास डिवाइस तैयार की है, जो सुनने और बोलने में अक्षम लोगों के लिए काफी मददगार साबित हाे सकती है।

साैरभ ने बताया कि की मेरी टीम ने इस खास डिवाइस का आइडिया एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय) के आइडिया हैकथाॅन 2022 में मेजबानी का दायित्व निभा रहे आईआईटी धनबाद काे भेजा है। साैरभ फिलहाल मध्यप्रदेश के एक संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं।

उन्हाेंने बताया कि यह खास डिवाइस बिना कानाें का उपयाेग किए आवाज काे मस्तिष्क तक पहुंचा देगी। इस स्टार्टअप आइडिया एमएसएमई के हाेस्ट इंस्टीट्यूट के ताैर पर आईआईटी धनबाद काे मिले। उनमें से साैरभ समेत 8 टीमाें के आइडिया का लेवल टू के लिए चयन कर एमएसएमई काे भेज दिया गया है। एमएसएमई ने फरवरी में आइडिया हैकथाॅन 2022 की घाेषणा की थी।

खेताें में बीज बाेने से लेकर फसल काे मंडी पहुंचाने में मदद करेगा माेबाइल एप

आपके खेत की मिट्टी कैसी है और उसमें काैन-काैन से फसल उपजाए जा सकते हैं? कितनी जमीन पर कितना अनाज हाे सकता है? कीड़े लग जाएं ताे क्या करें, आने वाले माैसम के लिहाज से तत्काल क्या कदम उठाए जा सकते हैं‌?

खेती-किसानी से जुड़ीं इन तमाम बाताें की जानकारी देनेवाले खास माेबाइल ऐप का आइडिया भी आईआईटी धनबाद काे मिला और इसका चयन भी लेवल टू के लिए किया गया। यह आइडिया जियाे इंटेलेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक डाॅ एस चटर्जी और विवेक चंद्र पाेद्दार की टीम ने दिया है।

उन्हाेंने बताया कि यह ऐप किसानाें काे बीज बाेने से लेकर फसल काे मंडी/बाजार में पहुंचाने तक मदद पहुंचाएगा। काेशिश है कि किसानाें काे उनकी समस्याओं का संपूर्ण समाधान एक ही जगह उपलब्ध कराया जाए।

शैवाल से प्लास्टिक और हैकथॉन में एजुकेशन टॉयज बनाने समेत अन्य आइडिया भी पसंद किए गए

हैकथाॅन 2022 के लेवल टू के लिए 6 अन्य आइडिया भी चुने गए हैं। धनबाद के विशाल सिन्हा ने एजुकेशन टाॅयज बनाने का आइडिया दिया है। वहीं, काेलकाता के एस भट्टाचार्या ने शैवाल (एल्गी) से प्लास्टिक बनाने और आम जनजीवन में उसका उपयाेग बढ़ाने का आइडिया दिया है।

इससे प्लास्टिक से हाेने वाले प्रदूषण काे नियंत्रित किया जा सकेगा। इसी तरह, एडूजा राेबाेटिक्स एंड ऑटाेमेशन के निदेशक डाॅ अरुण दयाल उदय ने ओद्याेगिक राेबाेट बनाने का आइडिया दिया है। ऐसे राेबाेट अमूमन फूड एंड बेवरेज,फार्मा,इलेक्ट्राॅनिक्स कारखानाें में उपयाेग में लाए जाते हैं।

 

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