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झारखण्ड मे शहर से गांवों तक भारी बिजली कटौती से लोग परेशान, जानिए कारण

झारखंड में जारी भीषण गर्मी के बीच बिजली उपभोक्ताओं की रात आफत में गुजर रही है। बीती रात झारखंड ने इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद के लिये बिड किया, लेकिन केवल 50 मेगावाट बिजली ही मिल पाई। इस कारण राजधानी रांची सहित तमाम शहरों में पूरी रात किस्तों में लोड शेडिंग की मार पड़ी। गांवों में हर दूसरे घंटे अंधेरा छाया रहा। स्कूलों का समय सुबह छह बजे से किये जाने के कारण अलसुबह जागने वाले छात्रों की नींद हराम हो गई। यह स्थिति बीती रात एक बजे से गुरुवार सुबह सात बजे तक बनी रही। इसके बाद सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और पन बिजली की उपलब्धता से पूरे दिन स्थिति सामान्य बनी रही।

राज्य में बिजली की मांग 2600 मेगावाट हो गई है। लेकिन, राज्य में उत्पादन एकमात्र संयंत्र टीवीएनएल से करीब 350 मेगावाट तक हो रहा है। शेष बिजली झारखंड बिजली उत्पादन निगम (जेबीवीएनएल) स्थानीय निजी उत्पादन इकाइयों आधुनिक पावर, इनलैंड पावर के अलावा राष्ट्रीय ग्रिड, सेकी और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से पूरी करने कोशिश कर रहा है।

दिन के वक्त डीवीसी कमांड एरिया के करीब 500 मेगावाट को शामिल करते हुये 2400 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध हो जा रही है। इसमें बड़ी राहत सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से पूर्व में हुये करार के तहत मिल रही 300 मेगावाट सौर, पवन और पन बिजली की उपलब्धता से मिल रही है। यह रात के समय लगभग नहीं मिल पा रही है जिससे संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

12 रुपये प्रति यूनिट पर भी बिजली के लाले

देश के ज्यादात्तर राज्यों में गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। उत्पादन से अधिक जरूरत की स्थिति में राज्यों को अतिरिक्त बिजली अग्रिम और ससमय बोली लगाकर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से 12 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से खरीदनी होती है। राज्यों की मांग के मुकाबले इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के पास बहुत कम बिजली उपलब्ध रह रही है।

ऐसी स्थिति में राज्यों राशनिंग के आधार पर बिजली दी जा रही है। यही कारण है कि झारखंड को बीती रात 500 मेगावाट की बोली लगाने पर केवल 50 मेगावाट बिलली उपलब्ध हो सकी। सामान्य रूप से राष्ट्रीय ग्रिड से 4.20 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद होती है। नवीकरणीय ऊर्जा लगभग 2.25 रुपये प्रति यूनिट की दर पर उपलब्ध है।

आयात कम, स्थानीय कोयला महंगा

यूक्रेन और रूस की लड़ाई का भी असर कोयला से बिजली उत्पादन करने वाले देश के संयंत्रों पर पड़ता हुआ दिख रहा है। देश में बिजली उत्पादन करने वाली कई निजी बड़ी उत्पादन इकाइयों में कोयला इंडोनेशिया, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के कोयले से होता है।

आयात करने वाले समुद्री जहाज रूस के पास अधिक हैं। इस समय रूस के समुद्री जहाज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण इन इकाइयों को स्थानीय कोयला से उत्पादन करना पड़ रहा है। इससे कोयला महंगा हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन पर असर पड़ा है। यूनिटों से लिंक वितरण कंपनियों को ध्यान में रखकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। इस कारण इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर बिजली सीमित हो गई है जबकि गर्मी के कारण मांग बढ़ने से राज्यों की एक्सचेंज पर निर्भरता बढ़ गई है। दो से तीन हजार रुपये प्रति टन में उपलब्ध कोयला 12 हजार रुपये प्रतिह टन से भी महंगा बिक रहा है।

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