झारखण्ड में 6 से 8वीं की कक्षाएं 24 सितंबर से शुरू हो रही है, देखिये सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन

झारखंड में छठी से आठवीं की ऑफलाइन क्लास 24 सितंबर से शुरू होगी। छात्र-छात्रा स्कूलों में जाकर पढ़ाई तो कर सकेंगे, लेकिन उनकी ऑफलाइन परीक्षा स्कूलों में नहीं होगी। हर महीने उन्हें झारखंड शैक्षिक अनुशंधान व प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की ओर से प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे वह घर से बनाकर स्कूलों में जमा करेंगे।

स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने इसकी गाइडलाइन जारी कर दी है। सभी सरकारी, आवासीय, गैर सरकारी सहायता प्राप्त, जैक की ओर से मान्यता प्राप्त, सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड से सम्बद्ध मान्यता प्राप्त गैर सरकारी स्कूलों में छठी से आठवीं की भी ऑफलाइन क्लास शुरू होगी। इन स्कूलों में नौवी से 12वीं की ऑफलाइन क्लास छह अगस्त से चल रही हैं। छठी, सातवीं और आठवीं में नामांकित छात्र-छात्राओं की ऑफलाइन क्लास डेढ़ साल के बाद शुरू होगी। छात्र-छात्राओं को स्कूलों में आने की अनिवार्यता नहीं होगी। जो बच्चे स्कूल आना चाहे तो वे अपने अभिभावकों की सहमति सह घोषणा पत्र लेकर आएंगे।

बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को ये निर्देश

  • ऑफलाइन पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज लेना अनिवार्य है।
  • स्कूल गेट पर ही हैंड सैनिटाइजर और साबुन की अनिवार्य रूप से व्यवस्था रहनी चाहिए।
  • स्कूल गेट पर ही थर्मल स्कैनर से सभी विद्यार्थियों और शिक्षकाें समेत स्टाफ की जांच करनी होगी।
  • स्कूल आने वाले छात्र-छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से स्कूल समन्वय स्थापित करते रहेंगे।
  • बच्चे अपने अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही स्कूल जा सकेंगे।
  • आवासीय स्कूलों के बच्चे भी अभिभावकों की सहमति मिलने के बाद ही हॉस्टल में रह सकेंगे।
  • विद्यालय विकास कोष से स्कूलों की सफाई और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था प्राचार्य करेंगे।

इनके लिए सुबह आठ बजे से 12 बजे तक क्लास का संचालन होगा। वहीं, जो बच्चे स्कूल नहीं आएंगे उनके लिए ऑनलाइन क्लास और डिजिटल कंटेट भेजना जारी रहेगा। शिक्षकों की सौ फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होगी। वे हर दिन बायोमेट्रिक हाजिरी बनाएंगे। इसमें इन पंच व आउट पंच दोनो होगा। शिक्षकों को ऑफलाइन क्लास लेने के लिए कम से कम कोविड का एक डोज लेना आ‌वश्यक होगा। स्कूलों में छात्र-छात्रा की संख्या बढ़ी तो दो पालियों में क्लास का संचालन हो सकेगा। साथ ही अगर ज्यादा बच्चे आएंगे तो ऑड-इवन रौल नंबर के आधार पर एक-एक दिन करके उन्हें स्कूल बुलाया जाएगा। स्कूल के प्रधानाध्यापक इसे तैयार करेंगे।