Homeझारखंडझारखण्ड में फिर बिजली संकट हो गया है, जानिए क्या है कारण

झारखण्ड में फिर बिजली संकट हो गया है, जानिए क्या है कारण

सूबे में एक बार फिर बिजली संकट पैदा हो गया है। मांग की तुलना में बिजली की आपूर्ति 330 से 370 मेगावाट तक कम होने से शहर से लेकर गांव तक लोड शेडिंग की नौबत आ रही है। स्थिति बिगड़ने के कारण राजधानी रांची में भी लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में सात घंटे या इससे भी अधिक और शहरों में चार घंटों तक की बिजली कटौती से लोग परेशान हो रहे हैं। झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) के निदेशक केके वर्मा का कहना है कि बिजली संकट की स्थिति अस्थाई है और इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।

राज्य में बिजली संकट कई कारणों से बन गया है और यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में कनकनी बढ़ने पर रूम हीटर, गीजर का उपयोग बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में आपूर्ति और उपलब्धता में सुधार नहीं होने पर राज्य में बिजली संकट और गहरा सकता है। इस समय राज्य में बिजली की मांग 1500 मेगावाट तक पहुंच रही है। दिन के वक्त बिजली मांग की तुलना में करीब 370 और शाम में 330 मेगावाट कम उपलब्ध हुई। एनटीपीसी के ओडिशा स्थित एक संयंत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण राज्य को बिजली कम मिल रही है।

दूसरी ओर डीवीसी कमांड एरिया में बिजली कटौती का सिलसिला बीते छह नवंबर से जारी है। डीवीसी कमांड एरिया धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह, रामगढ़, बोकारो में प्रतिदिन 600 मेगावाट बिजली आपूर्ति करता है, लेकिन जेबीवीएनएल पर 2174 करोड़ बकाया होने के कारण अल्टीमेटम देकर 50 प्रतिशत तक कटौती कर रहा है। डीवीसी कमांड एरिया में चार से छह घंटे तक की कटौती आम स्थिति बनी हुई है।

284 करोड़ राजस्व वसूली बनी परेशानी

जेबीवीएनएल के राज्य में 40 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं, लेकिन बिलिंग 30 से 35 लाख उपभोक्ताओं की ही हो पा रही है। ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से राजस्व वसूली में तेजी लाने के लिए लगातर हिदायतें दी जा रही हैं, लेकिन इस बार केवल करीब 285 करोड़ रुपये ही राजस्व के रूप में प्राप्त हुए हैं, जबकि लक्ष्य 450 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का रखा गया था। जेबीवीएनएल प्रबंधन ने उपभोक्ताओं से बिजली बिल का नियमित भुगतान करने की अपील की है, ताकि मांग के बराबर बिजली खरीद कर आपूर्ति की जा सके।

सिकिदरी हाइड्रो पावर तीन घंटे ही चला

सिकिदरी हाइड्रो पावर की दोनों यूनिटों से करीब 100 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। लेकिन यह उत्पादन शाम के वक्त केवल तीन घंटे के लिये हो पा रहा है। डैम में पानी की उपलब्धता संयंत्रों को चलाने के लिहाज से अब कम होता जा रहा है। इस कारण दोनों संयंत्रों को चलाकर बिजली उत्पादन कराने के लिये रविवार को जेबीवीएनएल और उत्पादन निगम के अधिकारी कवायद करेंगे। तेनुघाट से भी बिजली उत्पादन कम हो रहा है। इन कारणों से राज्य में बिजली संकट की स्थिति बढ़ गई है।

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