झारखण्ड के खेतों से फूलों की सुगंध और फलों की मिठास आ रही है, देखिये क्या है सरकार की योजना

झारखंड के किसान उद्यानिकी फसलों (Horticulture crops) के उत्पादन में रुचि ले रहे हैं. इनके लिए परंपरागत खेती बीते समय की बात हो गयी है. समय की जरूरत को देखते हुए किसान फलों, सब्जियों, औषधीय पौधों, फूलों की खेती एवं मधु का उत्पादन कर खुद को मजबूत कर रहे हैं. राज्य सरकार इसमें भरपूर सहयोग किसानों को दे रही है.

सीएम हेमंत सोरेन ने कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये थे कि राज्य की जलवायु एवं भौगोलिक स्थिति उद्यानिकी फसलों के लिए काफी उपयुक्त है. पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से यहां पर उद्यानिकी फसलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं. अधिक से अधिक किसान उद्यानिकी फसलों की खेती से जोड़े जायें. सीएम श्री सोरेन की पहल पर किसानों को उद्यान से जोड़ा जा रहा है. जिससे किसानों की आय में वृद्वि के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.

उत्पादन बढ़ाने के लिए किये गये कार्य

झारखण्ड के किसान उद्यानिकी फसलों से होने वाले मुनाफे को जानते हैं। यही वजह है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में फलों की खेती 110.57 हजार हेक्टेयर में हो रही है। अभी तक उत्पादन 1337.897 हजार मीट्रिक टन हुआ है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन 12.1 टन हैं। इसके अतिरिक्त 304 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती हो रही है। अब तक 4061.44 मीट्रिक टन सब्जी का उत्पादन हुआ है। वहीं 1.1 हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती की गई, जिससे 5.522 हजार टन फूल का उत्पादन हुआ। झारखण्ड में प्रति हेक्टेयर 5.02 टन फूल का उत्पादन हो रहा हैं। विभाग ने आनेवाले वर्षों में क्षेत्रफल एवं उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य तय किया हैं।

किसान लगा सकते हैं इकाई

राज्य में उद्यानिकी फसलों के उत्पाद को नुकसान से बचाने के लिए प्रसंस्करण की आवश्यकता होती है। सब्जियों एवं मसालों में विशेषकार टमाटर, अदरक, मिर्च, लहसुन तथा कटहल के पाउडर की प्रसंस्करण इकाई स्थापना का प्रस्ताव है। प्रसंस्करण से उत्पादों का गुण, स्वाद, बनावट आदि संरक्षित रहता है। राज्य के किसानों को प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए प्रति इकाई परियेजना लागत का अधिकतम 55 प्रतिशत अनुदान प्रस्तावित है। साथ ही कृषकों द्वारा उत्पादित फल एवं सब्जी को सुखाकर प्रिजर्वेशन यूनिट में संरक्षित किया जाता है। इसके लिए सरकार के स्तर से कृषकों को 50 प्रतिशत अनुदानित राशि भी दी जाती है। इससे कृषक लाभ उठाकर अपने आय की वृद्धि करते है।

राज्य सरकार किसानों को दे रही हर संभव सहयोग : कृषि निदेशक

इस संबंध में कृषि निदेशक निशा उरांव ने कहा कि राज्य के किसान हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में भी आगे बढ़े, इसको लेकर सरकार हर संभव सहयोग दे रही है. इसी का परिणाम है कि किसान फलों, सब्जियों और फूलों की खेती में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.