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झारखण्ड के इस शहर को सोलर सिटी बनाने का काम जल्दी होगा शुरू, सरकार निकालने वाली है टेंडर

झारखंड का गिरिडीह शहर जल्दी ही राज्य के पहला सोलर सिटी बन जायेगा. इसके लिए सरकार जल्दी ही टेंडर निकालने वाली है. जेरेडा के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दे दी है, जल्दी ही इसका टेंडर निकाला जायेगा और फिर गिरिडीह को सोलर सिटी बनाने का काम शुरू हो जायेगा.

सोलर सिटी योजना के तहत एक शहर के सभी घरों में सोलर रूफ टॉप पावर प्लांट लगाये जाने की योजना है . घरों की छतों पर सोलर पैनल की सहायता से एक किलोवाट से लेकर जरूरत के अनुसार सोलर पैनल लगाया जायेगा.

सोलर पैनल घरों की छतों पर या फिर खाली जमीन पर लगाया जायेगा

सोलर पैनल घरों की छतों पर या फिर खाली जमीन पर लगाया जायेगा. इसके लिए घर के मालिक या भू-स्वामी को सब्सिडी भी दी जायेगी. अतिरिक्त बिजली लेने के लिए वितरण निगम ग्रिड से कनेक्टिविटी भी देगा. सभी घरों में नेट मीटरिंग होगी. इस मीटर में वितरण निगम से बिजली लेने और सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली देने का हिसाब होगा.

गिरिडीह में साल के 300 दिन सूर्य की रौशनी रहती है

गिरिडीह झारखंड का ऐसा शहर है जहां साल के 300 दिन सूर्य की रौशनी रहती है, यही वजह है कि इसे सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है. हालांकि अभी ग्राउंड पर काम शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि टेंडर नहीं हुआ है, लेकिन योजना को मंजूरी मिल गयी है, जो बड़ी पहल है.

गौरतलब है कि सरकार प्रदेश में सोलर सिटी के साथ-साथ सोलर विलेज और सोलर डिस्ट्रिक्ट भी डेवलप करने की योजना पर काम कर रही है. झारखंड सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक प्रदेश में 5000 मेगावाट तक सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाये.

भारत सरकार ने 2070 तक शून्य उत्सर्जन का जो लक्ष्य रखा है, उसके तहत इस तरह की योजनाएं कारगर होंगी. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण के लिए 12,031 करोड़ रुपये स्वीकृत किये हैं. इस राशि से सात राज्यों में ग्रिड एकीकरण और 20,000 मेगावाट रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी लाइन बिछाने का काम किया जायेगा.

हरित ऊर्जा गलियारे का दूसरा चरण

दूसरे चरण के लिए स्वीकृत राशि से गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश में करीब 20,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं का ग्रिड एकीकरण एवं ट्रांसमिशन लाइन का काम किया जायेगा.

हालांकि हरित ऊर्जा गलियारे के फेज वन और फेज टू में झारखंड का जिक्र नहीं आया है, लेकिन बहुत संभव है कि जल्दी ही इस लिस्ट में झारखंड का नाम भी शामिल हो जाये और सौर एवं पवन ऊर्जा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था हो पाये.

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