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झारखण्ड में रांची समेत कई जिलों में आज भी हो सकती हैं बारिश, जानिए कब तक रहेगा ऐसा मौसम

झारखंड की राजधानी रांची सहित कई जिलों में बुधवार को बारिश होने की संभावना है। इस दौरान वज्रपात को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने विशेष बुलेटिन जारी कर चेतावनी दी है कि गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह आदि जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है।

रांची समेत इन ज‍िलों में हुई बार‍िश

मौसम विभाग ने कहा है क‍ि गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह जिलों में मंगलवार को कहीं-कहीं बूंदा-बांदी, तो कहीं कहीं हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश रिकार्ड की गई है। इधर, राजधानी रांची में सुबह से ही द‍िनभर बादल छाए रहे। राजधानी में भी रात करीब साढ़े नौ बजे बारिश हुई।

रांची में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा

मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी रांची में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बहती रही। अधिकतम तापमान में तीन डिग्री गिरावट होने और तेज हवा चलने से शाम होते ही सिहरन बढ़ गई। लोग कड़ाके की ठंड का सामना करने लगे। लोग अपने अपने घरों में दुबक गए।

29 और 30 दिसंबर तक ऐसा ही रहेगा मौसम

मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि 29 और 30 दिसंबर 2021 तक ऐसा ही मौसम देखने को मिल सकता है। उन्‍होंने कहा क‍ि इस दौरान बारिश होने और वज्रपात होने की भी संभावना है। इसे देखते हुए विभाग ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। खासकर किसानों को अपने खेतों में नहीं जाने और पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों से दूर रहने का निर्देश द‍िया है।

घना कोहरा होने को लेकर भी चेतावनी

 

मौसम विभाग ने विशेष बुलेटिन में बताया है कि 30 दिसंबर को घना कोहरा छाया रह सकता है। इस दौरान विजिबिलिटी काफी कम हो सकती है। मौसम व‍िज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि बारिश बंद होने के बाद कोहरा घना हो जाता है। वहीं धुंध में भी बढ़ोतरी होगी।

इन शहरों में ऐसा रहा तापमान (डिग्री)

शहर ——— अधिकतम — न्यूनतम

रांची ———— 21.8 ——– 14.2

जमशेदपुर —— 25.2 ——- 15.4

मेदिनीनगर —— 26.1 ——- 13.3

हीटर और कोयला का चूल्‍हा बंद कमरे नहीं जलाएं

झारखंड के हजारीबाग और रांची ज‍िले में कई लोग ठंड से बचने के ल‍िए कमरे में हीटर और कोयला का चूल्‍हा जलाकर सो गए। इसका असर यह हुआ क‍ि इन लोगों की मौत हो गई। दोनों ज‍िलों में अबतक सात लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है। दरअसल, कोयला के चूल्‍हे से न‍िकलने वाला धुआं खतरनाक होता है। डाक्‍टरों ने भी ऐसा करने से मना क‍िया है।

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