झारखंड में फिलहाल नहीं सस्‍ता होगा पेट्रोल-डीजल, जानिए क्या है कारण

झारखंड में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अलग से कोई कमी नहीं होने जा रही है। राज्य सरकार इस मसले पर कैबिनेट की बैठक में फैसला ले सकती है लेकिन अभी बैठक को लेकर तिथि भी तय नहीं हुई है। छठ के बाद कभी बैठक होने की संभावना है। झारखंड में पेट्रोल तो पड़ोसी राज्यों से कम कीमत पर मिल रही है लेकिन डीजल की कीमत कुछ अधिक है। हो सकता है कि इस आधार पर सरकार कोई फैसला करे लेकिन, माना जा रहा है कि सरकार इसके लिए कहीं से भी हड़बड़ी में नहीं है। विभाग में भी इस बात को लेकर कोई हलचल नहीं है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद ही किसी निर्णय पर विभाग पहुंचेगा।

राज्य सरकार पूरे प्रकरण पर नफा-नुकसान का आकलन जरूर कर रही है। इस आकलन के बाद ही कोई परिवर्तन की संभावना है। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी कहीं से भी इस मसले पर केंद्र के साथ जाने को तैयार नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अनुसार भाजपा के लोग जो अभी राज्य सरकार से कीमत कम करने की मांग कर रहे हैं, वे बता दें कि पिछले कुछ महीनों में कभी भी केंद्र सरकार से महंगाई कम करने को लेकर कोई मांग की गई हो। केंद्र ने दस रुपये कम किए हैं तो इसमें राज्य सरकार की ओर से भी सवा दो रुपये के आसपास की कमी हुई है। हम तो केंद्र के साथ ही चल रहे हैं। इधर, राज्य में कम वैट होने के आधार पर अलग से कोई छूट नहीं देने की बात भी कही जा रही है। वित्त मंत्री डा. रामेश्वर उरांव ने इस मसले पर सीएम से चर्चा के बाद कोई निर्णय लेने की बात कही है।

पिछले तीन माह से घट रही वैट की आमद, कम हुई खपत

झारखंड में पेट्रोल-डीजल पर वैट कटौती को लेकर राज्य सरकार पर खासा दबाव है। केंद्र की तर्ज पर वैट कम करने की मांग मुख्य विपक्षी दल भाजपा द्वारा उठाई जा रही है। लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से राज्य सरकार को हासिल क्या हो रहा है, इस पर नजर डाले तो परिणाम उल्टे दिखेंगे। सरकार की कमाई बढ़ने के बजाए घट गई है। सरकार की बैलेंसशीट बता रही है कि पिछले तीन माह से वैट से राज्य सरकार को होने वाली आमद में कमी आई है। टैक्स का सीधा गणित खपत से जुड़ा होता है। खपत बढ़ती है तो टैक्स बढ़ता है।

जाहिर है, पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों का बोझ जेब पर पड़ा तो लोगों ने खपत ही कम कर दी। खपत कम हुई तो टैक्स भी बढ़ने के बजाए घट गया। अगस्त माह में वैट से सरकार की झोली में 456.49 करोड़ आए थे, सितंबर में यह आंकड़ा घटकर 420.02 करोड़ हुआ और अक्टूबर में यह चार सौ के नीचे 384.88 करोड़ आ गया। जाहिर है जब पेट्रोल 90 से सौ की रेंज में था तो सरकार को ज्यादा नफा हो रहा था और जब सौ पार कर गया तो कमाई घट गई।

झारखंड में पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा समय 22 प्रतिशत वैट और एक फीसद सेस लिया जा रहा है, प्रतिशत में वैट होने के कारण कीमतों में वृद्धि से कमाई बढ़ती है लेकिन वह तब बढ़ती है जब खपत पूर्व की भांति जारी रहे। इधर, केंद्र सरकार के स्तर से पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: पांच रुपये और दस रुपये की एक्साइज ड्यूटी घटाई है। इससे राज्य सरकार का वैट भी तकरीबन डेढ़ रुपये प्रति लीटर कम हो गया है। यदि खपत अक्टूबर माह जैसी रही तो नवंबर से वैट से होने वाली आमद में और गिरावट आएगी।

वैट से होने वाली आय

माह वर्ष 2020 वर्ष 2021 वृद्धि

अगस्त 394.56 456.49 15.70

सितंबर 343.15 420.02 22.40

अक्टूबर 369.62 384.88 4.13