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झारखंड के एडॉप्शन सेंटर से गोद लेने के लिए सालों से इंतज़ार कर रहे हजारों दंपति, जानें विस्तार से

झारखंड के 12 एडॉप्शन सेंटर में कूल 226 अनाथ बच्चे है. वहीं, इन्हें गोद लेने वालों की 2782 परिवार इच्छुक है. लेकिन, प्रक्रिया इतनी जटिल है कि बच्चे को पाने में इनमें से अधिकतर तीन साल से इंतजार में हैं. बता दें, सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) की वेबसाइट पर लंबी प्रतिक्षा सूची को देखते हुए अब गोद लेने की प्रक्रिया को 1 सितंबर से सरल बनाई गई है.

गौरतलब है कि शेल्टर से बच्चों को गोद लेने के इच्छुक दंपती झारखंड और देश के ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के नागरिक भी शामिल हैं. सुखद पहलू है कि जिन 25 हजार परिवारों ने गोद लेने का आवेदन किया है, उन्होंने बच्चियों को अपनाने में उत्सुकता दिखाई है. उनकी फर्स्ट च्वाइस बच्चियां हैं. हालांकि, बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान होने वाली जांच-पड़ताल में इच्छुक अभिभावक पैमाने पर खरे नहीं उतरते. धनबाद के कतरास के रहने वाले रमेश ने बताया कि उन्होंने बच्ची को गोद लेने का आवेदन किया. पिछले तीन सालों से इंतजार में हूं. मुझसे जो दस्तावेज मांगे गए, वो दे दिए.

जानें गोद लेने की प्रक्रिया
दरअसल, बच्चे को गोद लेने इच्छुक को सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता है. रजिस्ट्रेशन के 30 दिनों के अंदर कागजात अपलोड करने होते हैं. गोद लेने वाले बच्चे के बारे में आप पूछ नहीं सकते, पर प्राथमिकता के आधार पर लिंग, धर्म और उम्र बता सकते हैं. सामाजिक संस्था होम स्टडी कर रिपोर्ट तैयार करती है, जिसमें गोद लेने के इच्छुक की आर्थिक क्षमता और सामाजिक स्तर पर व्यक्तित्व का आकलन किया जाता है. प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बच्चे की तस्वीर भेजी जाती है. बच्चा पसंद आने के बाद गोद लेने का आवश्यक कार्रवाई की जाती है.

डीसी के माध्यम से भी लिया जा सकता है गोद
बता दें, गोद लेने की प्रक्रिया में देरी की वजह से नियम में कुछ बदलाव किया गया है. आवेदन और वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पुरानी ही है. लेकिन, प्रक्रिया पूरी होने के बाद फैमिली कोर्ट की अंतिम मुहर लगने के बाद ही यह पूरी होती थी. वर्ष 2021 में गोद लेने की व्यवस्था में बदलाव किया गया, जो 1 सितंबर को लागू हुआ नई व्यवस्था में अब फैमिली कोर्ट के बजाए संबंधित जिले के डीसी निगरानी में बच्चे की गोद लेने की प्रक्रिया को पूरी की जाएगी.

इधर, बाल अधिकार कार्यकर्ता शंकर रवानी कहते हैं कि सूबे के शेल्टर होम से कनाडा और फ्रांस में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने भी गोद लेने के लिए आवेदन किया है.

 इस आयु के दंपती ही ले सकते हैं गोद
खबर के मुताबिक, 4 साल तक आयु के बच्चे को गोद लेने को इच्छुक माता-पिता की आयु मिलाकर अधिकतम 90 साल, 4 से 8 साल के बच्चे के लिए माता-पिता की अधिकतम उम्र 100 वर्ष और 8 से 18 साल के आयु के लिए माता-पिता की कुल उम्र मिलाकर 110 वर्ष होनी चाहिए. इससे अधिक दंपती की कुल आयु से अधिक उम्र पर आवेदन खारिज होते हैं.

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