Homeझारखंडचाची-दादा को 7वीं-8वीं का छात्र बता 23 करोड़ उड़ाए, वित्तीय वर्ष 2019-20...

चाची-दादा को 7वीं-8वीं का छात्र बता 23 करोड़ उड़ाए, वित्तीय वर्ष 2019-20 में केंद्र ने राज्य को दिए थे 61 करोड़

फाइल फोटो

कल्याण विभाग में प्री मैट्रिक के अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली करोड़ों रुपए की छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा हुआ है। डीबीटी के जरिए लाभुकों के पैसे दूसरों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। छात्रों के लिए वर्ष 2019-20 में केंद्र ने झारखंड को 61 करोड़ रुपए दिए थे। इनमें से करीब 23 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया। रामगढ़ के दुलमी स्थित फैजुल रज्जा मदरसा में सबसे पहले इसका हुआ। यहां महिला-पुरुषों को 7वीं-8वीं का छात्र बताकर छात्रवृत्ति दी गई।

इनमें फैजुल रज्जा मदरसा में कौसर नेयाज, मुबारक अंसारी, मंजर आलम, ताहिर अंसारी समेत लगभग एक दर्जनों महिला-पुरुष हैं। फर्जीवाड़े में बिचौलियों ने कई ऐसे लोगों को भी शामिल किया है, जो उम्र से चाचा-चाची, दादा हैं। अंजुमन कमेटी ने रामगढ़ डीसी को आवेदन दिया तो दुलमी के बीईईओ सुरेश चौधरी व कल्याण पदाधिकारी आलोक मित्रा ने जांच की। पता चला कि मदरसा डेढ़ साल से बंद है। बाद में लोहरदगा, धनबाद समेत अन्य जिलों में जांच करने घोटाले का पता चला।

बिचौलियों का ये था फाॅर्मूला- डीबीटी के जरिए खाते में भेजे जाएगा 10700 रु., आधा-आधा बंटेगा

बिचौलियों ने फाॅर्मूला दिया कि आपके खाते में 10 हजार 700 रुपए आएंगे। इसमें से आधा आपका होगा और आधा हमारा। इस हिसाब से करोड़ों रुपए वैसे लोगों को मिले, जो छात्र नहीं हैं। लाभुक छात्रों से आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट लिया गया था, लेकिन डीबीटी (डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर) के माध्यम से पैसे उनके खाते में नहीं जाकर दूसरे के खाते में गए। बिचौलियों ने पासवर्ड में हेराफेरी कर इस काम को अंजाम दिया है।

स्कूल में 80 बच्चे, छात्रवृत्ति दे दी 323 को

धनबाद जिले के इंदिरा गांधी मेमोरियल हाईस्कूल में सिर्फ तीन कमरे हैं। यहां 80 बच्चे ही पढ़ते हैं। लेकिन 2019-20 में यहां 323 बच्चों छात्रवृत्ति दी गई। छात्रावास में रहनेवाले बच्चों को ही यह वजीफा दी जाती है, पर यहां कोई हॉस्टल नहीं है, फिर भी हॉस्टल होने की बात कह 323 गलत लोगों को छात्रवृत्ति मिली।

पूर्व मंत्री लुईस के समय का घोटाला, होगी जांच :सीएम

दुमका स्थित खिजुरिया आवास में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी के कार्यकाल में हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) छात्रवृत्ति घाेटाले की राज्य सरकार जांच कराएगी। इसके लिए मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को आदेश दे दिया गया है। जल्द ही जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। सीएम ने इस घोटाले से संबंधित अंग्रेजी अखबार में छपी खबर का हवाला देते हुए सवाल पूछा कि दुमका की जनता क्या ऐसे घोटालेबाज भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाएगी।

छात्रवृत्ति देने का यह है प्रावधान

Most Popular