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कहानी मैसूर सैंडल सोप की: किस तरह एक राजा ने लगभग 100 साल पहले बना दी सबसे बेहतरीन साबुन कि फैक्ट्री

मैसूर सैंडल सोप, दुनिया का सबसे शुद्ध चंदन के तेल से बने साबुन के रूप में विख्यात है। आज बाजार में तरह तरह के साबुन के ब्रांड मौजूद है। लगभग हर ब्रांड अपना सैंडल सोप मार्केट में उतार चुका है। लेकिन मैसूर सैंडल सोप की बराबरी कोई नहीं कर सका। इसका इस्तेमाल मैसूर का शाही परिवार करता था। आज भी साबुन को शाही लोगों की पसंद के तौर पर देखा जाता है।

इसके फैक्ट्री के बनने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है।

जफैक्ट्री उस वक्त लगाई गई थी जब भारत पर अंग्रेजों की हुकूमत थी। प्रथम विश्व युद्ध का दौर चल रहा था।

पूरा यूरोप युद्ध में व्यस्त था। ऐसे में मैसूर से निकलने वाला चंदन की लकड़ी विदेशों में नहीं जा पा रही थी।

मैसूर में चंदन की लकड़ी का विशाल भंडार था। के लिए तत्कालीन राजा कृष्णा राजा वाडियार -IV ने बेंगलुरु में इसकी फैक्टरी स्थापित करवाई।

उन्होंने अपना ख्याल दीवान मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के साथ साझा किया और फिर काम शुरू हुआ सैंडल सोप बनाने का। विश्वेश्वरैया ने ऐसे साबुन की परिकल्पना की जो मिलावटी ना हो और सस्ता भी रहे। उन्होंने बॉम्बे (आज की मुंबई) के तकनीकी विशेषज्ञों को आमंत्रित किया। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के परिसर में साबुन बनाने के प्रयोगों की व्यवस्था की गई। साबुन में असली चंदन के तेल का इस्तेमाल होना और फिर इसके शाही घराने से ताल्लुक ने साबुन को और भी लोकप्रिय बना दिया।देखते ही देखते सोप का व्यापार कर्नाटक से निकलकर पूरे देश में फैल गया। साल 1944 में, शिवमोगा में एक और इकाई की स्थापना की गई। अब यहां साबुन के साथ ही चंदन के तेल और इत्र भी बनाया जाने लगा।

आज यह भारत की एकमात्र साबुन कंपनी है जो सरकार के अधीन में है। आज यह कर्नाटका सॉप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) के अधीन है। साल 2006 में इस कंपनी ने महेंद्र सिंह धोनी को अपना ब्रांड अंबेसडर बनाया। आज यह कंपनी प्रतिवर्ष 6500 टन साबुन का उत्पादन करती है तथा इसके उत्पादन क्षमता 26000 टन की है जो देश में सर्वाधिक है।

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