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आपके घरों की बिजली कभी भी गुल हो सकती है, डीवीसी के पावर प्लांट ठप

Power Cut ALERT खराब मौसम के कारण दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के ताप विद्युत प्रतिष्ठानों पर असर पड़ा है। राज्य स्थित कोडरमा, चंद्रपुरा और बोकारो में डीवीसी के विद्युत संयंत्रों के उत्पादन पर इसका असर पड़ा है। इसके कारण झारखंड के साथ-साथ बंगाल में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इन पावर प्लांट्स में कोयले की भी किल्लत हो गई है। डीवीसी के कोलकाता स्थित मुख्यालय ने इस संबंध में अधिकारियों को आगाह करते हुए निर्देश दिया है कि स्थिति सामान्य करने की दिशा में तत्परता से कार्रवाई करें। झारखंड के आठ जिले डीवीसी कमांड एरिया में आते हैं। इसके अलावा बंगाल में डीवीसी बिजली की आपूर्ति करती है।

डीवीसी के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि संस्थान उपभोक्ताओं के लिए प्रतिबद्ध है। डीवीसी के पावर स्टेशन और सब-स्टेशन पर भी लगातार बारिश का विपरीत असर पड़ा है। इससे लगातार बिजली आपूर्ति में दिक्कतें आ रही है। विद्युत संयंत्रों को कोयले की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह कोयला ट्रांसपोर्टिंग की समस्या है। डीवीसी प्रबंधन स्थिति सामान्य करने में जुटा हुआ है।

बिजली वितरण निगम ने भी जारी किया अलर्ट

झारखंड बिजली वितरण निगम ने भी भारी बारिश को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। मुख्यालय ने आदेश जारी किया है कि सारे कर्मी सतर्क रहें और विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें। आपूर्ति बाधित होने की दशा में तत्काल ठीक करने की कोशिश की जाए। एहतियात के तौर पर सारे विद्युत स्टेशन पर कर्मी तैनात रहें।

राजस्‍व की कम हो रही वसूली

उद्योग के लिए बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बुनियादी जरूरत है। जिन क्षेत्र में उद्योगों का विकास हुआ है, वहां बिजली की उपलब्धता के कारण ही यह संभव हो पाया है। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भी यह आवश्यक है। राज्य सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व बिजली की कंपनियों को घाटा शून्य करने के लिए विखंडन की प्रक्रिया को अंगीकार किया था। हालांकि इसके अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए। उपभोक्ताओं को भी इसका ख्याल रखना होगा कि बिजली आपूर्ति के मद में भुगतान नियमित करें।

राजस्व की कम वसूली के कारण बिजली क्षेत्र में कामकाज पर असर पड़ता है। राज्य सरकार को रिसोर्स गैप के मद में हर साल भुगतान करना पड़ता है। अगर यह समाप्त हो जाए तो नई बिजली परियोजनाओं पर कामकाज आरंभ किया जा सकता है। फिलहाल चतरा में नए निर्माण से दामोदर घाटी निगम पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। अगले चरण में बाकी बचे उन इलाकों में भी निगम पर निर्भरता खत्म होने के आसार हैं, जो उनके कमांड क्षेत्र के दायरे में आता है। पूरी तरह से आत्मनिर्भर होने के बाद झारखंड के विकास की गति और तेज हो सकेगी।

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