एक साल में खाद्य तेलों का दाम 52% तक हो गया महंगा, देखिये नया दाम

खाने के तेल (edible oil) की कीमतों में जुलाई महीने में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक, जुलाई 2021 में 2020 की तुलना में करीब 52 फीसदी का इजाफा (Edible oil price) देखने को मिला है. आम जनता की जेब पर इसका सबसे ज्यादा असर हुआ है. राज्यसभा में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया ने बताया कि खाद्य पदार्थों के सामान पर महंगाई को रोकने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से दाल, खाद्य तेल और जरूरी सामान में तेजी देखने को मिली है, लेकिन सरकार इनकी कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार काम कर रही है.

मूंगफली तेल 19.24 फीसदी महंगा हुआराज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आंकड़ों जारी कर कहा कि मूंगफली तेल की औसत मासिक खुदरा कीमत में जुलाई के दौरान, बीते साल की समान अवधि की तुलना में 19.24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

जुलाई में कौन सा तेल कितना हुआ महंगा?जुलाई में सरसों के तेल में 39.03 फीसदी, वनस्पति में 46.01 फीसदी, सोया तेल में 48.07 फीसदी, सूरजमुखी के तेल में 51.62 फीसदी और पाम तेल की कीमतों में 44.42 फीसदी का इजाफा हुआ है. बता दें यह सभी आंकड़े 27 जुलाई 2021 तक के हैं.

सरकार ने ड्यूटी में कटौती कीआगे चौबे ने कहा कि खाद्य तेलों की कीमतों को कम करने के लिए, कच्चे पाम तेल (CPO) पर शुल्क में 30 जून 2021 से 30 सितंबर 2021 तक 5 फीसदी की कटौती की गई है. इस कमी ने सीपीओ पर प्रभावी कर की दर को पहले के 35.75 फीसदी से घटाकर 30.25 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा, रिफाइंड पाम तेल / पामोलिन पर शुल्क 45 फीसदी से घटाकर 37.5 फीसदी कर दिया गया है.

आगे उन्होंने कहा कि रिफाइंड ब्लीच्ड डियोडोराइज्ड (RBD) पाम तेल और आरबीडी पामोलिन के लिए एक संशोधित आयात नीति 30 जून, 2021 से लागू की गई है, जिसके तहत इन वस्तुओं को प्रतिबंधित से मुक्त श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया है. भारत अपनी कुल खाद्य तेलों की जरूरत का लगभग 60-70 प्रतिशत आयात करता है.