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आईआईटी पटना के नाम एक और उपाधि, 5000 स्क्वायर फ़ीट में लगाए गए सोलर प्लेट, सरकार को भी बेच रही है बिजली

सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में आईआईटी पटना को बड़ी उपाधि मिली है। दरअसल, आपको बता दे कि आईआईटी पटना की 9 बिल्डिंग को सोलर प्लेट से पूरी तरह से आच्छादित कर दिया गया है। इस सोलर प्लेट से प्राप्त होने वाली बिजली से आईआईटी पटना की सारे इक्विपमेंट, एसी और दैनिक कार्यों में काम करने वाले विद्युत चालित यंत्र ऑपरेट होते हैं। इन सोलर प्लेट की बदौलत आईआईटी पटना पिछले 3 सालों से प्रतिवर्ष औसतन 30 लाख रुपए सालाना बिजली के बिल की बचत कर रहा है।

आईआईटी पटना के परिसर में 5000 स्क्वायर फ़ीट फ़ीट में लगे है सोलर प्लेट
आईआईटी पटना के चीफ एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अनिल वर्मा बताते हैं कि संस्थान के एकेडमिक एचआर बिल्डिंग, फूड कोर्ट, गर्ल्स एंड बॉयज हॉस्टल और हॉस्पिटल की बिल्डिंग पर पूरी तरीके से सोलर प्लेट लगा दी गई है. इन सभी एरिया को मिलाकर देखा जाए तो तकरीबन 5000 स्क्वॉयर फीट में सोलर प्लेट लगाए गए हैं. दरअसल, 2017 में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था और 2019 में इसे पूरा किया गया। इन प्लेट्स को भारतीय सौर ऊर्जा निगम द्वारा सूर्यम कंपनी द्वारा लगाया गया है। ये पलेट्स रेसको मॉडल पर आधारित हैं। यानी प्लेट्स कंपनी द्वारा लगाए गए हैं और जगह आईआईटी पटना ने उपलब्ध कराया है।

सरकार को भी दे रही है बिजली
इन सोलर प्लेट से मिलने वाली ऊर्जा से संस्थान अपना सारा काम करता है और जो ऊर्जा बच जाती है। उसे बिहार सरकार को बेच दिया जाता है. इसकी मॉनिटरिंग के लिए विशेष रूप से NET मीटर लगाया गया है। इससे बिजली प्रोडक्शन, बिजली के बिल और बिहार सरकार को सप्लाई होने वाली ऊर्जा का पूरा विवरण प्राप्त हो जाता है। इन सोलर प्लेट की क्षमता में और वृद्धि होना है और उन संस्थान की कई अन्य इमारतों पर इन प्लेट को लगाना है। उद्देश्य यही है कि अक्षय ऊर्जा के दम पर आईआईटी पटना अपनी ऊर्जा को खुद ही प्रोडक्ट करे।

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