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अच्छी खबर : झारखण्ड वासियों को जल्द बिजली किल्लत से मिल सकती है राहत, जानिए किस ज़िला से होगी आपूर्ति

झारखंड के चतरा स्थित नॉर्थ कर्णपुरा थर्मल पावर प्लांट से झारखंड को करीब चार साल से बिजली मिलने का इंतजार जुलाई-अगस्त में खत्म होने की उम्मीद है। पहले चरण में 660 मेगावाट का उत्पादन करने के लिये 27 मार्च से तीन हजार आरपीएम (स्पीड) पर टर्वाइन चलाना शुरू कर दिया गया है। यहां बिजली उत्पादन की स्थिति बन गई है, लेकिन बिजली के संचरण के लिये हाई टेंशन लाइन नहीं बना है। यह लाइन नॉर्थ कर्णपुरा ट्रांसमिशन लिमिटेड (एनकेटीएल) को बनानी है। लाइन बनने के एक माह बाद बिजली का वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। लाइन बनने के बाद बिजली उत्पादन का ट्रायल शुरू होगा। इस दौरान भी झारखंड बिजली उत्पादन निगम (जेबीवीएनएल) को बिजली मिलने लगेगी। इससे राज्य में बिजली आपूर्ति में सुधार होगा।

तीन इकाइयों से कुल 1980 मेगावाट का उत्पादन

नार्थ कर्णपुरा थर्मल पावर प्लांट में चरणबद्ध तरीके से 660 मेगावाट के तीन इकाइयों से कुल 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। जेबीवीएनएनल अधिकारियों के मुताबिक इस प्लांट से 500 मेगावाट बिजली खरीद समझौता (3.25 रुपये प्रति यूनिट की दर पर) हो चुका है। पहली यूनिट से दिसंबर 2018 में उत्पादन शुरू होना था, लेकिन मुआवजा, नौकरी जैसी मांगों को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध, कोरोना काल, संचरण लाइन नहीं बनने आदि कई कारणों से लगभग चार वर्षों की देरी हुई है। दूसरे चरण में इस वर्ष के अंत तक 660 मेगावाट की सेकेंड यूनिट से उत्पादन शुरू होगा।

देरी से झारखंड की मुश्किलें बढ़ीं

जेबीवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती आबादी और भीषण गर्मी में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गई है। दूसरी ओर नॉर्थ कर्णपुरा से करार के तहत बिजली मिलने में देरी होती जा रही है। इस कारण अस्थाई व्यवस्था के तहत इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से हर दिन बिड लगाकर 12 रुपये प्रति यूनिट तक की दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। एक्सचेंज में बिजली की कमी के कारण राज्य को लगाई गई बोली के मुकाबले बहुत कम बिजली मिल पा रही है। नॉर्थ कर्णपुरा के साथ करार के कारण अन्य उत्पादन इकाइयों से करार नहीं किया जा रहा है।

बिजली नहीं लें कैप्टिव प्लांट

सूत्रों के अनुसार जेबीवीएनएल ने बढ़ते संकट के बीच राज्य के कैप्टिव प्लांट से आग्रह किया है कि वे खुद की उत्पादित बिजली से प्लांट संचालित करें। ग्रिड से फिलहाल बिजली नहीं लेने का प्रयास करें। ताकि, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके। इसके आलावार जेबीवीएनएल की ओर से स्टेट लोड डिस्पैच्ड सेंटर को बिजली की राशनिंग के लिये कार्ययोजना सौंप दी गई है।

बिजली की कम उपलब्धता के कारण लोड शेडिंग

झारखंड में बिजली की मांग 2600 मेगावाट है, लेकिन, एकमात्र उत्पादन इकाई तेनुघाट से केवल 350 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन हो रहा है। बाकी बिजली राष्ट्रीय ग्रिड, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, स्थानीय निजी इकाइयों से झारखंड खरीदता है। इसके बाद एकाएक बढ़ी हुई मांग की पूर्ति के लिये इंडियन एनर्जी ऐक्सचेंज से ससमय और पूरे दिन की मांग के अनुमान के आधार पर लगाई गई बोली पर उपलब्ध होती है। जेबीवीएनएल 500 मेगावाट की मांग लगातार कर रहा है, लेकिन एक्सचेंज से उपलब्धता बहुत कम हो गई है। शनिवार को 92 मेगावाट बिजली मिली।

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