अच्छी खबर : झारखण्ड के पयर्टन स्थलों का होगा विकास, राज्यपाल केंद्र से भी दिलाएंगे मदद

राज्यपाल रमेश बैस ने कहा है कि राज्य में पर्यटन क्षेत्रों का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। जबकि यहां पर्यटन की अपार संभवनायें हैं। उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ राजभवन में सोमवार को बैठक के दौरान कहा कि वह राज्य के प्राकृतिक दृष्टिकोण से समृद्ध पर्यटक स्थलों में आधारभूत संरचनायें विकसित कराने के लिये समर्पित भाव से काम करें। इस काम में राशि की चिंता न करें, जरूरत पर वह केंद्र सरकार से वार्ता कर झारखंड में पर्यटन के विकास के लिये राशि की मांग करेंगे।

झारखंड के विकास के प्रति हैं प्रतिबद्ध

राज्यपाल ने कहा कि वह झारखंड के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं, ताकि विकास के क्षेत्र में इस राज्य की राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान बन सके। उन्होंने कहा कि पर्यटन राज्य के विकास व राजस्व में अहम भूमिका कर सकता है। प्रदेश को प्रकृति ने असीम खूबसूरती प्रदान की है, इन्हें विकसित करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम करके पर्यटकों को सुविधायें उपलब्ध कराना होगा, ताकि राज्य के पर्यटन स्थलों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हो और लोग यहां आने के प्रति अधिक-से-अधिक आकर्षित हों।

यह एक विडम्बना है!

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक दृष्टिकोण से समृद्ध होने के बावजूद झारखंड राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थलों में अपना नाम स्थापित नहीं कर सका है, यह एक विडम्बना है। वह इस स्थिति में बदलाव लाना चाहते हैं और राज्य को अन्य स्मृद्ध पर्यटन स्थलों के बराबर देखना चाहते हैं। बताया कि पर्यटन से विशेष लगाव के कारण उन्होंने छत्तीसगढ़ एवं त्रिपुरा में विभिन्न पर्यटन स्थलों को विकसित करने में भूमिका निभाई है।

राज्यपाल ने पर्यटन स्थलों के पास रात्रि ठहराव के लिये सुविधाएं उपलब्ध करने और टूरिस्ट सर्किट बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि टूरिस्ट सर्किट इस तरह बनाया जाये जिससे एक से दूसरे पर्यटक स्थल तक पर्यटक रेल मार्ग, सड़क मार्ग या हवाई मार्ग से पहुंच सकें। उन्होंने राज्य को धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यन्त समृद्ध बताते हुए अलग धार्मिक टूरिस्ट सर्किट बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने राजमहल में स्थापित फॉसिल्स पार्क में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।