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Tunisha Sharma Death Case: ना नींद मिलती है ना वीकली ऑफ! हलवा नहीं है टीवी एक्टर बनना

तुनिषा शर्मा की मौत ने फिर एक बार यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई टीवी इंडस्ट्री में काम करना बहुत घाटे का सौदा बन गया है? पिछले कुछ ही वक्त में लगातार कई एक्टर्स का यूं अचानक चले जाना फिर से सवाल उठाता है कि क्या टीवी कलाकार स्ट्रेस में जी रहे हैं और पर्दे के पीछे उनकी जिंदगी बहुत तकलीफदेह है। तुनिषा की मौत के बाद जानिए बाकी के टीवी एक्टर्स का इस बारे में क्या कहना है?

ना नींद है ना आराम, घंटों तक लगातार काम
एक दिन में 15 से 18 घंटे तक की शूटिंग और तमाम तरह का शारीरिक एवं मानसिक दबाव कलाकारों को तोड़कर रख देता है। टीवी एक्टर प्रिया मलिक ने बताया, ‘मैंने टीवी एक्टर्स को एक भी दिन के ब्रेक की डिमांड किए बगैर 55 दिनों तक लगातार काम करते देखा है। यह किसी भी तरह से हेल्दी प्रैक्टिस नहीं है।’ वैशाली ठक्कर और प्रत्युषा बनर्जी जैसे प्रोफेशनली सक्सेसफुल कलाकार एक वक्त के बाद डिप्रेशन और एंग्जाइटी से जूझ रहे थे।

कॉम्पटीशन है सारे फसाद की जड़?
टीवी प्रोड्यूसर और क्रिएटिव डायरेक्टर निवेदिता बसु ने कहा, ‘एक ही दिन में 14 से 16 घंटे तक काम करना हम जैसे लोगों के लिए टॉक्सिक है जो कैमरे के पीछे कड़ी मेहनत करते हैं, कई बार तो दिन इससे भी लंबा हो जाता है। इस बेहिसाब प्रेशर के पीछे वजह है कॉम्पटीशन। जब 5 लोग अपने वर्किंग आवर्स स्ट्रेच करने से मना कर देते हैं तो 10 लोग ऐसे हैं जो उसी काम को करने के लिए लाइन में तैयार बैठे हैं… और सारी दिक्कत यहीं से शुरू होती है।’

हलवा नहीं हैं एक्टर या सुपरस्टार बनना
निवेदिता ने कहा कि वह एक ऐसे सिस्टम की तारीफ करेंगी जो फिक्स वर्किंग आवर्स देता हो। ताकि हर किसी के पास बाकी चीजों के लिए भी वक्त हो। हालांकि इस बारे में प्रोड्यूसर संदीप सिकचंद ने कहा कि कलाकारों को इस फील्ड में आने से पहले मेंटली प्रिपेयर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘कई लोग इस इंडस्ट्री में यह सोचकर आते हैं कि यह तो हलवा है। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि यहां लगातार काम करना पड़ता है, और यह आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।’ संदीप ने कहा, ‘यह वो कीमत है जो आप फेम और पॉपुलैरिटी के लिए चुकाते हो।’

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