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S&P ने कहा- चीन समेत इन देशों के बैकों की हालत इस साल के अंत तक सुधर जाएगा. लेकिन भारत

नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकों की   रिकवरी में 2023 या उससे अधिक वक्त लग सकता है. इसमें भारत सहित अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का बैंकिंग सिस्टम भी शामिल है. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और रूस शामिल हैं. जबकि चीन, कनाडा, सिंगापुर, हांगकांग, साउथ कोरिया और सऊदी अरब जैसों देशों की बैंकिंग सिस्टम 2021 के पहले ही रिकवर हो जाएगी.वहीं, भारत, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका में कोविड-19 स्तर की रिकवरी के लिए 2023 तक इंतजार करना पड़ सकता है. कोरोना के कारण बिगड़ी बैंकिंग स्थिति की वजह बढ़ता एनपीए है, जो भारत में 30 जून तक 8.42 लाख करोड़ रुपए हो गया है. इसमें कहा गया है कि भारत के लिए रिकवरी करना अन्य के मुकाबले अधिक कठिन होगा.

जानिए भारतीय बैकों को लेकर एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) ने और क्या कहा- रिकवरी के मामले में भारत अन्य देशों के मुकाबले सबसे नीचे रहेगा. एजेंसी ने भारतीय बैंकों और नॉन- बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीच्यूशन (NBFI) के लिए नेगेटिव रेटिंग दी है, क्योंकि कोरोना के कारण पैदा हुई स्थितियों से बैंकों का ऑपरेशन धीमा हुआ है.

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बैंकिंग सिस्टम में रिकवरी के साइज का अनुमान लगाने के लिए ग्लोबल लेवल पर 20 सबसे बड़ी बैंकिंग सिस्टम का विश्लेषण किया है.

ये भी पढ़ें-बैंक अकाउंट में न हो एक भी रुपया! फिर भी जरूरत पर निकाल सकते हैं पैसा, इस बैंक ने शुरू की ये खास स्कीम इसके लिए बैंकों के अधिकार क्षेत्रों को तीन ग्रुप प्रारंभिक-एक्सटीरियर, मिड-एक्सिटर और लेट-एक्सिटर में डिवाइड किया गया, जो प्री-कोविड की स्थिति के अनुमानित रिकवरी पर आधारित हैं. इसमें भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेट-एक्सिटर के तौर पर कंसीडर किया गया है.

भारतीय बैकों को लेकर रघुराम राजन ने दिए सुझाव- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य (Viral Acharya) ने साथ मिलकर भारतीय बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधारने के सुझाव दिए हैं. दोनों ही अर्थशास्त्री आरबीआई में अपने कार्यकाल के बाद एकेडमिक गतिविधियों से जुड़ गए हैं.

सरकारी बैंकों में सुधार को लेकर रिसर्च पेपर में पीएसयू बैंकों के बोर्ड और मैनेजमेंट के लिए स्वतंत्र रूप से कामकाज की छूट देने का सुझाव दिया गया है. राजन और आचार्य ने सरकारी हिस्सेदारी के लिए एक होल्डिंग कंपनी बनाने का प्रस्ताव ​रखा है.

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यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे बीते तीन दशक में बैंकिंग रिफॉर्म पर गठित कई समितियों ने दिया है. एक अन्य सुझाव में बैंकों को उनके अनिवार्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सरकार की तरफ से दिए जाने भुगतान के बारे में है. दोनों अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बैंक खाता खोलने जैसी गतिविधयों के लिए लागत रिइम्बर्स कर सकते हैं.

रघुराम राजन और विरल आचार्य ने बैड लोन यानी एनपीए की समस्या से निपटने के लिए तीन रास्ते सुझाए हैं. केंद्रीय बैंक के दोनों बैंकर्स ने कहा, दबावग्रस्त कंपनी के लेनदारों के बीच तय समय में बातचीत के लिए आउट-ऑफ-कोर्ट रिस्ट्रक्चरिंग फ्रेमवर्क को डिजाइन किया जा सकता है. ऐसा न कर पाने पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में अप्लाई करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि फंसे हुए कर्ज के बिक्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डेवलप करने पर विचार करना चाहिए. इससे लोन सेल्स में रीयल टाइम ट्रांसपरेंसी देखने को मिलेगी. आखिर में, राजन और आचार्य का कहना है कि दबावग्रस्त लोन सेल्स के लिए प्राइवेट एसेट मैनेजमेंट एंड नेशनल एसेट मैनेजमेंट ‘बैड बैंक्स’ को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के समानांतर प्रोत्साहित करना चाहिए.

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