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OPINION: क्या यूपी में कांग्रेस सेट करेगी 2022 के विधानसभा चुनाव का एजेंडा?

लखनऊ. यूपी में कांग्रेस (Congress) की राजनैतिक हैसियत क्या है? विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ही आधार मान लें तो जवाब साफ मिल जाता है. कुछ नहीं. सिर्फ 7 विधायकों वाली ये पार्टी पिछले कई सालों से यूपी में बस सांस ले रही है. लेकिन, अब हालात बदलते दिख रहे हैं. कांग्रेस को लेकर राजनीतिक पंडितों में अब ये सोच पैदा होने लगी है कि यूपी के 2022 के विधानसभा चुनाव (2022 Assembly Elections) में शायद यही वो पार्टी है, जो इलेक्शन का एजेंडा सेट करेगी. यानी इस पार्टी के उठाये मुद्दे चुनाव में हावी रहेंगे.

लेकिन, सवाल उठता है कि कांग्रेस ही क्यों? सत्ता में रह चुकी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी क्यों नहीं? कांग्रेस में आखिर ऐसा क्या बदला है? जिसकी वजह से वह मुख्य विपक्षी की भूमिका में तेजी से आगे आती जा रही है. जवाब है संगठन और नेतृत्व. प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के दलबल का संघर्ष और प्रियंका गांधी का नेतृत्व.

जो पार्टियां मास बेस के आधार पर पावरफुल हैं, वो वोकल नहीं हैंप्रयागराज के जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी यूपी की राजनीति में कांग्रेस के बढ़ते वाइब्रेशन को साफ देख रहे हैं. वो कहते हैं, “इस समय प्रियंका गांधी का राजनीति के नैतिक पक्ष पर जोर है. यूपी में वही इस समय वोकल ऑपोजीशन हैं. जो पार्टियां मास बेस के आधार पर पावरफुल हैं, वो वोकल नहीं हैं. ये सच है कि उनका वोट ज्यादा है, जनाधार ज्यादा है लेकिन, इश्यूज़ को आगे लाने में वे आगे नहीं हैं. जिस तरह का एजेंडा प्रियंका गांधी सेट करेंगी, उस पर बीजेपी रेस्पांड करेगी. इससे बहस भी उसी दिशा में जाएगी.”

वह कहते हैं, “प्रियंका गांधी जब कोई प्रश्न उठाती हैं तो सीएम योगी आदित्यनाथ उसका जवाब देते हैं. जाहिर है प्रियंका पावरफुल वॉयस हैं. ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आपके पास वोट कितने हैं. अहम ये है कि आप कौन हैं. उनके पास एक ऑरा भी है और वो मुद्दे को ऐसा खड़ा करती हैं कि वो फिर बहस में बदल जाती है. कई बार सरकार से टकराव भी होता है लेकिन फिर भी उन्हें सरकार की ओर से जवाब तो दिया ही जाता है.”

प्रियंका ने कई मुद्दे छेड़े, जिन पर शुरू हुई बहस
यूपी में कांग्रेस की कमान हाथ में लेने के बाद प्रियंका गांधी ने कई मुद्दों को ऐसी हवा दी, जिस पर प्रदेश में बहस छिड़ी. इसके अलावा उन्होंने दर्जनों मुद्दों पर सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठियां लिखीं. इनमें न सिर्फ आरोप के बाण थे बल्कि कई मसलों पर सरकार को सुझाव भी दिये. बुनकरों और मनरेगा कामगारों के मुद्दों पर उनकी सलाह पर सरकार ने सकारात्मकता दिखाई तो लॉक डाउन के समय प्रवासी मजदूरों के लिए बसों के मामले पर उनसे जबरदस्त टकराव भी हुआ. उनके इस कदम में एक सकारात्मक विपक्ष की छवि देखी जाने लगी है.

यूपी में निर्जीव पड़ी कांग्रेस अपने दम पर मुद्दे खड़े कर रही है
हालांकि लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार योगेश श्रीवास्तव इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते कि कांग्रेस आने वाले इलेक्शन का एजेंडा सेट करेगी. उन्होंने कहा कि ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन, ये तो अंतर आया ही है कि लम्बे अरसे बाद कांग्रेस सड़क पर दिख रही है. इसके अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष में बातचीत हो रही है, जिसका सिलसिला प्रियंका गांधी ने शुरू किया है. इतना तो दिख रहा है कि यूपी में निर्जीव पड़ी कांग्रेस अपने दम पर मुद्दे खड़े कर रही है. हालांकि चुनाव में अभी लम्बा वक्त बाकी है. तब तक स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी? ये कहना अभी मुमकिन नहीं है.

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