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OMG! अर्थी उठने की थी तैयारी, बेटे के शव के पास दहाड़े मार कर रो रही थी मां, तभी युवक की चलने लगी सांस…

जिउतिया के दिन एक मां की आस को ईश्वर ने टूटने नहीं दिया। व्रत की लाज रख ली। राजधानी पटना के कंकड़बाग के निजी अस्पताल से मृत घोषित बेटा सौरभ (17 साल) की घर पर सांसें चलनी लगीं। आनन-फानन में परिजनों ने युवक को पीएमसीएच में भर्ती कराया है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 

मृत घोषित करने के बाद निजी अस्पताल ने युवक को परिजनों को सौंप दिया। धोखे से डेथ सर्टिफिकेट की बजाय रेफर का कागज थमा दिया। लाचार परिजन क्या करते, शव समझ युवक को घर ले आए। हरदास बिगहा के कटौना गांव स्थित घर पर दाह संस्कार की तैयारी चल रही थी। उसकी अर्थी पूरी तरह सज गई थी। 

घर में उसकी मां और परिजन दहाड़ मारकर रो रहे थे। कुछ ही देर बाद उसकी अर्थी को गंगा किनारे घाट पर जलाने ले जाने वाले थे। लेकिन अचानक अर्थी पर पड़े सौरभ की ऊंगलियां हिलने लगीं और धड़कन चलने लगीं। सौरभ की आंखें भी कुछ देर के लिये खुलीं।  इतना देख परिजनों में उत्साह जगा। रोना-धोना रुक गया। परिजन उसे पीएमसीएच लेकर आए। पीएमसीएच की इमरजेंसी में भर्ती सौरव का इलाज चल रहा है।

इमरजेंसी के प्रभारी डॉ अभिजीत सिंह सिंह ने बताया कि सौरभ की कहानी सुन बहुत अजीब लगा। उन्होंने बताया कि जब वह यहां पहुंचा तो उसकी सांसें चल रही थी। हालांकि लड़का बेहोश था लेकिन शरीर में हल्की हलचल थी। उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उसे बचाने में लगी हुई है। हालांकि उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 

तीन दिन पूर्व हुआ था भर्ती
सौरभ के परिजन बताते हैं कि कंकड़बाग के अस्पताल में 7 तारीख की रात दस बजे उसे भर्ती कराया गया था। सौरभ दुर्घटना में घायल हुआ था। 2 दिनों में निजी अस्पताल में लगभग दो लाख रुपये का बिल चुकाने के बाद अस्पताल ने हाथ खड़े कर दिए। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। बाद में वेंटिलेटर से उतार कर उसकी बॉडी को पैक करके एंबुलेंस में डाला गया। जबकि धोखे से जो सर्टिफिकेट दिया गया है उसपर रेफर लिख दिया गया था।

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