Live News – क्या वाकई हवा से पानी बनाया जा सकता है, जिस बारे में पीएम मोदी ने की थी बात

पिछले दिनों डेनमार्क के प्रधानमंत्री के साथ पीएम मोदी ने बातचीत में ‘विंड एनर्जी टरबाइन के जरिए हवा से पानी बनाने की बात की थी. उस वीडियो पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सवाल उठाने और बीजेपी नेताओं के इसे एकदम रिसर्च सम्मत बताने के बाद सोशल मीडिया पर इस पर बहस चल पड़ी है. हम यहां ये देखते हैं कि क्या वाकई हवा से पानी बनाया जा सकता है. क्या ऐसे शोध या काम हुए हैं, जिससे जाहिर होता है कि हम हवा में मौजूद नमी से सीधे पानी बना सकते हैं.

वैसे ये बात तो सबको मालूम है कि हवा में हमेशा पानी मौजूद रहता है. ये दावा पिछले दिनों किया गया था कि हवा में मौजूद पानी को एक खास तकनीक के ज़रिए निकाला जा सकता है जो पीने लायक और काफी शुद्ध होगा. इस दावे के पीछे विकसित की गई एक खास तकनीक है. जिस पर मशीनें बनने लगी हैं. बिकने भी लगी हैं. क्या आपने इस तकनीक और मशीन के बारे में जाना?

कुछ समय पहले न्यूज 18 ने #मिशनपानी के तहत लगातार इस बारे में आप तक तमाम खबरें और परियोजनाओं से वाकिफ कराया.अब हम आपको बताते हैं कि भारत खासकर दक्षिण भारत के चेन्नई में कुछ लोग इस तरह की मशीनों का इस्तेमाल कर भी रहे हैं, जो हवा से पानी निकालने की तकनीक पर बनी हैं. वास्तव में पानी निकल रहा है और शुद्ध भी.

इस तकनीक को वातावरणीय जल उत्पादन यानी एटमॉसफेरिक वॉटर जनरेटर कहा जाता है. सुनने में भले ही कोई आम सी चीज़ लगे, लेकिन इस समय ये किसी चमत्कार से कम नहीं है. आइए इस बारे में और जानें.

क्या है ये तकनीक और मशीन?
आपने मौसम की तमाम खबरों से गुज़रते हुए आर्द्रता या ह्यूमिडिटी शब्द सुना है. इस शब्द का मतलब हवा में पानी की मौजूदगी से ही समझा जाता है. एटमॉसफेरिक वॉटर जनरेटर इसी तकनीक पर काम करता है कि हवा में मौजूद पानी को लिक्विड के रूप में निकाला जा सके. ये मशीन बिजली से चलती है, जिसमें कॉइल्स लगी होती हैं. इनकी मदद से हवा में मौजूद पानी कंडेंस होकर द्रव रूप में आ जाता है. फिर इस मशीन में फिल्टर लगाए गए हैं, जिनके ज़रिए ये पानी शुद्ध रूप में आपको मिलता है.

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भारत में इन मशीनों का आना
देश में पहली बार 2005 में वॉटरमेकर नाम की कंपनी ने इस तरह की मशीन की शुरुआत की थी. इस कंपनी को शुरू करने वाले मेहर भंडारा ने एक मीडिया समूह को बताया कि शुरुआत में इन मशीनों को लेकर मुश्किलें आईं लेकिन पिछले करीब तीन सालों से इनकी बिक्री होने लगी है. ये कंपनी घरों, स्कूलों और क्लीनिकों में हवा से पानी निकालने वाली मशीनें सप्लाई कर रही है.

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तमिलनाडु के एक स्कूल में लगी वॉटरमेकर की मशीन.

वहीं, कोलकाता में भी ऐसी एक कंपनी एक्वो है, इसके प्रमुख नवकरण बग्गा का कहना है कि ये मशीन आपको पानी का एक स्वतंत्र स्रोत देती है, जिसके लिए आपको किसी और पर निर्भर नहीं रहना होता. हैदराबाद में मैत्री एक्वाटेक ने इस मशीन को मेघदूत नाम दिया है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौता करते हुए ऐसी एक लाख मशीनें बनाने का ज़िम्मा उठाया है.

आम लोगों तक कैसे पहुंचेंगी ऐसी मशीनें
अभी तक इन मशीनों का इस्तेमाल कॉरपोरेट्स या लद्दाख जैसे कठिन इलाकों में सेना के लिए होता रहा है. लेकिन, जलसंकट के चलते अब इन मशीनों को आम जनता तक पहुंचाने की कोशिशें हो रही हैं. भारी क्षमता वाली इन मशीनों को अब 25 से 100 लीटर पानी उत्पादन करने की क्षमता वाला बनाया जा रहा है, जो घरों के उपयोग के लिहाज़ से है.

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क्या होगी कीमत?
घरों में उपयोग के लिहाज़ से 25 से 30 लीटर पानी क्षमता वाली ये मशीनें बनाई जा रही हैं. विभिन्न कंपनियों की कीमतों के हिसाब से ऐसी एक मशीन आपको 45 से 70 हज़ार रुपये तक की कीमत में मिल सकेगी. वहीं दफ्तरों, स्कूलों या बड़ी कंपनियों के लिहाज़ से 5000 लीटर पानी पैदा करने वाली क्षमता तक की मशीनें भी बन रही हैं. मैत्री कंपनी की 1000 लीटर क्षमता वाली मशीन की कीमत करीब दस लाख रुपये है.

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चेन्नई के एक घर में लगी वॉटरमेकर की रेज़िडेंशियल मशीन.

हवा दूषित है तो पानी शुद्ध कैसे?
अब सवाल ये है कि हवा में अगर प्रदूषण के तत्व पाए जाते हैं तो इससे निकलने वाला पानी कैसे शुद्ध होगा. इस बारे में मशीन बनाने वाली कंपनियां दावा कर रही हैं कि इन मशीनों में फिल्टर की तकनीक लगाई गई है, जिनके ज़रिए पानी शुद्ध और पीने लायक निकलेगा. पांच स्टेप में पानी फिल्टर होगा और ये फिल्टर स्टेप हैं कचरा हटाना, प्री कार्बन, पोस्ट कार्बन, खनिज गुणवत्ता सुधार और यूवी फिल्टर.

तो अब दुआ कीजिए कि ह्यूमिडिटी बनी रहे
इन मशीनों की उपलब्धता के बाद फायदा तो ये होगा कि आपको पानी के लिए किसी और स्रोत पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा लेकिन इसकी एक शर्त भी होगी. वो ये कि हवा में अगर आर्द्रता ज़्यादा होगी, तभी पानी निकल सकेगा. यानी हवा में अगर ह्यूमिडिटी 20 फीसदी से कम है, तो ये मशीन पानी नहीं निकालेगी. मैत्री कंपनी के एमडी रामकृष्णन कहते हैं कि ये मशीनें भविष्य हैं. उनकी मानें तो अगर हम वातावरण से सिर्फ 0.1 फीसदी आर्द्रता को ही कन्वर्ट कर लेंगे तो हम सबके लिए पीने का पर्याप्त पानी होगा.