Live News – आपके शहर में इस वजह से 2 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीज़ल!

नई दिल्ली. कोरोना महामारी संकट के बीच आम आमदी को महंगाई भी लगातार सता रही है. लेकिन अगले 2-3 महीने में इससे राहत मिल सकती है. क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil Price Down) के दाम बीते एक हफ्ते के दौरान 8 फीसदी तक लुढ़क गए है. ऐसे में एक्सपर्ट्स घरेलू स्तर पर पेट्रोल डीज़ल की कीमतों में गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं. एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च आसिफ इकबाल ने न्यूज18हिंदी को बताया कि कच्चा तेल सस्ता होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को राहत मिलेगी. क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. पिछले कुछ महीनों से पेट्रोल के दाम लगातार बढ़े हैं या स्थिर रहे हैं. तेल कंपनियों पर दाम घटाने का दबाव है. लिहाजा ब्रेंट क्रूड के दाम गिरने से अब कंज्यूमर्स को राहत मिल सकती हैं. मौजूदा स्तर से अगर क्रूड में 20 फीसदी की कमी आती है तो पेट्रोल और डीजल में 5 फीसदी कमी की जा सकती है.  लिहाजा पेट्रोल और डीजल 2.5 से 3 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है.

3 रुपये तक सस्ते हुए पेट्रोल-डीज़ल- दिल्ली की बात करें तो 10 सितंबर के बाद से इसमें ठहर ठहर कर कमी का रुख है. अब तक ये 1.19 रुपये  प्रति लीटर तक सस्ता हो चुका है. वहीं, इस दौरान डीजल 3.10 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो चुका है.

6 फीसदी लुढ़का कच्चा तेल- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. साथ ही, कच्चे तेल की डिमांड लगातार गिर रही है. इसी वजह से क्रूड कीमतों पर दबाव है. क्योंकि कोरोना वायरस के मामले जहां बढ़ रहे हैं. वहां, बिजनेस गतिविधियां धीमी पड़ रही है. इसीलिए डिमांड में कमी आ रही है. इसी वजह से कई कंपनियों ने डिस्काउंट देना शुरू कर दिया है कि उनका प्रोडक्शन खप जाए. ऐसे में आगे क्रूड में फिर बड़ी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता है. अक्टूबर तक ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 32 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ सकते हैं.

अब भारत में फिर से बढ़ने लगी पेट्रोल-डीज़ल की डिमांड: सितंबर महीने में पेट्रोल की डिमांड 2 फीसदी बढ़ गई. कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए मार्च के आखिर में देश में लॉकडाउन लगाया गया था. इसके बाद से पेट्रोल की बिक्री में पहली बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे पता चलता है कि इस वाहन ईंधन की मांग कोविड-19 के पूर्व के स्तर पर पहुंच रही है. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के शुरुआती आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 90 फीसदी है. हालांकि, डीजल की बिक्री सामान्य स्तर से कम है, लेकिन माह-दर-माह आधार पर इसमें बढ़ोतरी हुई है. आंकड़ों के अनुसार सितंबर में पेट्रोल की बिक्री दो फीसदी बढ़ी है.

पिछले महीने की तुलना में पेट्रोल की बिक्री में 10.5 फीसदी का इजाफा हुआ है. हालांकि, डीजल की मांग अभी नकारात्मक बनी हुई है. सालाना आधार पर डीजल की बिक्री में सात फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि, अगस्त की तुलना में डीजल की बिक्री 22 फीसदी अधिक रही है. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े आयातक देश में 25 मार्च के लॉकडाउन के बाद पहली बार पेट्रोल की बिक्री बढ़ी है. सितंबर में पेट्रोल की बिक्री बढ़कर 22 लाख टन पर पहुंच गई. पिछले साल समान महीने में यह 21.6 लाख टन थी. अगस्त, 2020 में पेट्रोल की बिक्री 19 लाख टन रही थी.

देश में सबसे ज्यादा उपभोग वाले ईंधन डीजल की बिक्री सितंबर में घटकर 48.4 लाख टन रह गई. सितंबर, 2019 में यह 52 लाख टन रही थी. वहीं अगस्त, 2020 में डीजल बिक्री 39.7 लाख टन थी.