Live News – अब खाना पकाना और गाड़ी चलाना हो सकता है सस्ता, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली. सरकार ने एक अक्टूबर से शुरू होने वाली अगली छमाही के लिये प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का दाम 25 फीसदी घटाकर 1.79 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) तय किया है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ONGC और ऑयल इंडिया के नामांकन आधार पर उन्हें दिये गये क्षेत्रों से निकलने वाली प्राकृतिक गैस का दाम एक अक्टूबर से अगले छह माह के लिये अब 1.79 डॉलर प्रति एमबीटीयू होगा. एक सरकारी आदेश में यह कहा गया है. आदेश में कहा गया है कि इसके साथ ही मुश्किल गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली गैस का दाम भी 5.61 डॉलर से घटाकर 4.06 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दिया गया है.

हर 6 महीने पर तय होती हैं कीमतें
प्राकृतिक गैस की कीमतें हर 6 महीने पर तय होती हैं. हर साल 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर से प्राकृतिक गैस के नई कीमतें लागू हो जाती हैं. ये दाम अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे सरप्लस देशों के आधार पर ​तय किए जाते हैं. 1 अक्टूबर से लागू होने वाली दर ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को मई 2020 के पहले पेमेंट जितना ही होगा. मई 2020 के पहले ही फॉर्मुला आधारित प्राइसिंग सिस्टम को लाया गया था.

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प्राकृतिक गैस की कीमतो में इस कटौती का अर्थ है कि देश की सबसे बड़ी ऑयल एंड गैस उत्पादक कंपनी ONGC का घाटा बढ़ेगा. हालां​कि, इसका एक लाभ यह जरूर हो सकता है इलेक्ट्रिसिटी उत्पादन का खर्च कम हो जाए. CNG और PNG के दाम में भी कमी आ सकती है.

चालू वित्त वर्ष में बढ़ सकता है ONGC के गैस सेग्मेंट का घाटा
ONGC सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी को गैस बिजनेस से 4,272 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. जब संभव है कि चालू वित्त वर्ष (अप्रैल 2020 से मार्च 2021) में यह बढ़कर 6,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाए.

सरकार ने नवंबर 2014 में नये गैस प्राइसिंग फॉर्मुला को लागू किया था जोकि गैस सरप्लस देश जैसे अमेरिका, कनाडा और रूस के प्राइसिंग पर आधारित है. इसके कुछ समय बाद से ही ओएनजीसी को डोमेस्टिक फील्ड्स हर दिन 65 मिलियन स्टैंडर्ड क्युबिक मीटर्स गैस का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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इस साल ऑयल बिजनेस नहीं हो सकेगी भरपाई
पिछले साल की बात करें तो गैस सेग्मेंट में होने वाले नुकसान की भरपाई ऑयल बिजनेस से पूरी हो गई थी. लेकिन, इस साल बेंचमार्क कीमतों बड़ी गिरावट की वजह से ऑयल बिजनेस पर पहले से ही दबाव बना हुआ है. ऐसे में कंपनी के लिए मुश्किल है कि वो परिचालन खर्च को ही पूरा करे. (भाषा इनपुट के साथ)