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Jharkhand News- न बीएड स्कूल चल रहे हैं और न ही छात्र पढ़ते हैं, पर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के नाम पर 16 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा

फाइल फोटो

विशाखापट्‌टनम के कोट्‌टावालसा क्षेत्र का एक घर। दो कमरे। महीनों से बंद। भूले-भटके कभी कोई वहां जाता है। स्कूल जैसा कोई माहौल नहीं, लेकिन कल्याण विभाग की फाइलें कहती हैं कि वहां झारखंड के 200 छात्र बीएड की पढ़ाई कर रहे हैं। वे वहां डे-स्कॉलर के रूप में कक्षाएं करते हैं। इसका नाम है क्रिस्ट कॉलेज ऑफ एजुकेशन। सामने में दो कमरे का दूसरा मकान है, जिसका नाम है- जीसस डोग्गा कॉलेज ऑफ एजुकेशन।

इसका भी हाल-हुलिया है। पढ़ाई नहीं होती, लेकिन झारखंड के 200 बच्चों का बीएड पढ़ाई के लिए नामांकन हुआ है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए इन सभी बच्चों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के नाम पर 40-40 हजार रुपए मिले हैं। कल्याण विभाग झारखंड के अफसर इन बीएड स्कूलों को खोजने पहुंचे तो भौंचक रह गए। वहां बीएड कॉलेज नहीं, ऑफिस हैं। अफसरों ने जांच की तो पता चला कि 8 राज्यों के 22 फर्जी संस्थानों ने 4000 से ज्यादा फर्जी छात्रों को दिखाकर करीब 16 करोड़ रुपए का घोटाला किया है।

4000 से ज्यादा फर्जी छात्रों को दिखाकर किया घपला

नियम- हॉस्टल में रह रहे विद्यार्थियों को ही मिल सकती है छात्रवृत्ति

नियमानुसार कल्याण विभाग फुल टाइम कोर्स के आधार पर उन छात्रों को ही पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति देता है, जो दूसरे राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टल में रहकर डे-स्कॉलर के रूप पढ़ाई करते हैं। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में झारखंड के हजारों छात्र अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं और उन्होंने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है।

घालमेल- खाता खोल छात्रों से चेक पर ले लिया जाता है साइन

पाेस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े के लिए फर्जी कॉलेजों द्वारा छात्रों के नामांकन के लिए एजेंट नियुक्त किए जाते हैं। मकान में संस्थानों का बोर्ड तो लगा होता है, पर पढ़ाई नहीं होती। सिर्फ एडमिशन दिखा दिया जाता है। ऐसे संस्थान छात्रों के नाम से खाता खोलकर और चेक पर उनसे साइन लेते हैं और बाद में छात्रवृत्ति राशि सेल्फ चेक के जरिए प्रबंधन खुद निकाल लेता है।

छात्रवृत्ति का स्लैब

ये अर्हताएं जरूरी

ये सुलगते सवाल

1. कल्याण विभाग ने न इन संस्थानों पर केस किया, न ही काली सूची में डाला है। सिर्फ शो-कॉज किया।2. नियमावली 2.18 के अनुसार-दूसरे राज्यों में सामान्य एकेडमिक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं।

अखबारों में जो छप रहा है, विभाग के संज्ञान में है। एक-एक बिंदु पर विस्तृत जांच होगी। अगले तीन दिन के बाद इन सभी विषयों पर विभाग की ओर से बताया जाएगा।

-अमिताभ कौशल, कल्याण सचिव

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