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Bihar news- West Bengal Election Results : क्या ममता बनर्जी की हैट्रिक में लेफ्ट और कांग्रेस का भी है बड़ा हाथ ?

हाइलाइट्स:

  • बीजेपी क्यों कर रही थी बंगाल में जीत की उम्मीद
  • क्या बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस ने अपने वोट को चुपचाप TMC में कराया ट्रांसफर
  • मोदी विरोध में अपना वजूद मिटाकर कांग्रेस और वाम दल ने ममता को दी संजीवनी : प्रेम रंजन पटेल
  • पटना।बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 291 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 263 सीट पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। इसी चुनाव में कांग्रेस ने 44 और सीपीएम ने 26 सीटें जीती थीं। हालांकि इस बार सीपीएम और कांग्रेस की हालत बदतर हो गई है लेकिन मिशन 200+ लेकर चली बीजेपी 3 सीट से छलांग लगाकर 90 तक पहुंचती नजर आ रही है।

    बीजेपी क्यों कर रही थी बंगाल में जीत की उम्मीददरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बंगाल में 2 सीटें और 2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव मिली बीजेपी को 3 सीटें मिली थी। जबकि 2019 के लोकसभा चुनावों में बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 18 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। आपको यह भी बता दें कि 2014 में बीजेपी ने 17.2 प्रतिशत वोट हासिल किया था जो 2019 में बढ़कर 40.64 प्रतिशत पहुंच गया था। जो TMC के 43.69 प्रतिशत वोट के बेहद करीब था। इसी वजह से 2019 में TMC को 2014 के मुकाबले लोकसभा में 12 सीटें कम मिली थी। वहीं सीपीएम कभी अपने कर रहे बंगाल में 2019 लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी तो 2021 बंगाल चुनाव सीपीएम के साथ मिलकर लड़ रही कांग्रेस को 2019 लोकसभा चुनाव में महज 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

    लोकसभा चुनाव 2019 में मिली 18 सीटें और वोट प्रतिशत के आधार पर बीजेपी का आकलन कि बंगाल में अगर मेहनत ज्यादा किया जाए तो वहां सत्ता पर काबिज हुआ जा सकता है। बीजेपी की यह सोच इसलिए भी थी की बंगाल में ममता बनर्जी के तुष्टीकरण की राजनीति के वजह से लोग परेशान हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी 10 साल के शासनकाल की वजह से एंटी इनकंबेंसी फैक्टर का भी सामना कर रही थी। इन सारी बातों का गहराई से अध्ययन करने के बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी पूरी टीम को बंगाल में उतार दिया था। बीजेपी के दिग्गजों की रैली में उमड़ रही भीड़ और चुनाव की तारीख की घोषणा होने से पहले ओपिनियन पोल के आंकड़े भी यही बता रहे थे कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो सकता है।

    क्या बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस ने अपने वोट चुपचाप TMC में कराया ट्रांसफर ?आठ चरण में होने वाले बंगाल चुनाव 2021 में चुनाव प्रचार की अगर बात करें तो वहां प्रचार के दौरान टीएमसी और बीजेपी दिखाई दे रही थी। जबकि कांग्रेस के साथ मिलकर मैदान में उतरे वाम दल का चुनाव प्रचार कहीं नजर नहीं आ रहा था तो कांग्रेस की भी बड़े नेता बंगाल के चुनावी दंगल में बहुत कम नजर आए। यहां तक की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक बंगाल चुनाव में जिस तरह से चुनाव प्रचार किया उसे देखकर कहीं से नहीं लग रहा था कि कांग्रेस बंगाल चुनाव को लेकर जरा भी गंभीर है। बंगाल कांग्रेस और वामपंथी मोर्चे के अनुरोध के बावजूद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने बंगाल के बजाय केरल चुनाव को ज्यादा तवज्जो दिया।

    मोदी विरोध में अपने वजूद को मिटाकर कांग्रेस और वाम दल ने ममता को दी संजीवनी : प्रेम रंजन पटेलबिहार बीजेपी के पूर्व विधायक, प्रदेश प्रवक्ता और बंगाल चुनाव में उत्तर बंगाल के 54 सीट के संयोजक बनाए गए प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि बंगाल में बीजेपी 3 सीट से बढ़कर 100 से अधिक सीटों पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी मिशन 200 + का लक्ष्य जरूर प्राप्त करती अगर कांग्रेस और वामपंथी ईमानदारी से चुनाव लड़े होते। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि कांग्रेस और वामपंथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में अपना वजूद खत्म करते हुए अपने वोटर को टीएमसी (TMC) में ट्रांसफर करा दिया। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन शुरू से ही यह जान रहे थे कि इस बार मुकाबला बीजेपी (BJP) और टीएमसी के बीच है। लिहाजा मोदी विरोध की वजह से कांग्रेस (CONGRESS) और वामपंथियों (LEFT) ने अपने वोट ममता बनर्जी (MAMTA BANERJEE) को ट्रांसफर करा दिया। पटेल ने कहा कि बंगाल चुनाव 2021 में कांग्रेस और वामपंथियों का बंगाल से वजूद ही समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि 2016 के चुनाव में 76 सीट पर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस और लेफ्ट आज एक सीट के लिए जद्दोजहद कर रही है।

    दिल्ली की तरह बंगाल में भी हुआ कांग्रेस – लेफ्ट वोट का ट्रांसफरबीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि जिस तरह दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के तमाम वोटर आम आदमी पार्टी में शिफ्ट हो गए थे। उसी प्रकार बंगाल में कांग्रेसी और वामपंथियों ने अपने वोटरों को ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शिफ्ट करा दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल में 30% मुस्लिम वोटर है जो एक तरफा ममता बनर्जी की ओर चले गए। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि बंगाल में बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ रही थी। ऐसे में तमाम विरोधियों को यह लगता था कि अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है तो केंद्र में नरेंद्र मोदी और भी ज्यादा मजबूत हो जाएंगे। यही वजह है कि बंगाल में कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन तो हो गया लेकिन यह गठबंधन ममता बनर्जी के लिए काम करता रहा। कांग्रेस और लेफ्ट के नेता ने चुपचाप अपने कैडर वोटरों को टीएमसी शिफ्ट करा दिया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो अभी तक बंगाल में बीजेपी की सरकार बन चुकी होती।

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