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Bihar news- बिहार में कोरोना मैनेजमेंट देखकर सन्न रह जाएंगे, एक करोड़ 92 लाख रुपये से खरीदी गई 6 एंबुलेंस… लेकिन चाट रही धूल

हाइलाइट्स:

  • बिहार में कोरोना मैनेजमेंट देखकर सन्न रह जाएंगे
  • एक करोड़ 92 लाख रुपये से खरीदी गई 6 एंबुलेंस
  • सभी 6 एंबुलेंस 8 साल में सड़क पर उतरी तक नहीं
  • बिहार सरकार के परिवहन विभाग के हो ही नहीं पाया रजिस्ट्रेशन
  • आकाश कुमार, औरंगाबाद:कोरोना काल में लोगों को अब सिर्फ भगवान का सहारा है क्योंकि सरकार तो सरेंडर की हालत में दिख रही है। बिहार के बड़े-बड़े सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं हैं। वेंटिलेटर है तो वो या तो इन्सटॉल नहीं हो पाया है या फिर उसका ऑपरेटर ही नहीं है। औरंगाबाद का हाल जानकर तो सन्न रह जाइएगा।

    1.92 करोड़ की 6 एंबुलेंस 8 साल में सड़क पर नहीं उतरीकाराकाट लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2009 में सांसद बने महाबली सिंह ने अप्रैल 2013 में दाउदनगर, ओबरा, हसपुरा, गोह, बारुण और नवीनगर पीएचसी के लिए बेसिक लाइफ एंबुलेंस (बीएलए) दी थी। प्रत्येक की खरीद पर 32 लाख रुपये की लागत आई थी। इन एंबुलेंस का बीते आठ वर्ष में एक बार भी इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। Bihar Corona Update : कोरोना काल में नीतीश ने सौंप दी अपने सिपहसालारों को जिम्मेवारी, जानिए कौन है आपके जिले का प्रभारी मंत्रीवजह जानेंगे तो सरकार को कोसेंगेसवाल ये कि आखिर जब संसाधन हैं तो इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा? एंबुलेंस है तो चल क्यों नहीं रही? कोरोना काल में जब लोगों को अस्पताल जाने की जरुरत आन पड़ी है तो एंबुलेंस धूल क्यों चाट रही है? जवाब भी जान लीजिए… सरकारी लापरवाही के चलते आज तक यानि 8 साल में परिवहन विभाग से इनका रजिस्ट्रेशन तक नहीं हो पाया।

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    प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली- सांसदकाराकाट सांसद महाबली सिंह ने बताया कि एंबुलेंस देने के बाद वे चुनाव हार गए। उनका आरोप है कि बाद में एंबुलेंस के निबंधन के लिए किसी ने कोशिश ही नहीं की। जब महाबली सिंह दोबारा चुनाव जीत कर आए तो स्वास्थ्य मंत्री, जिला पदाधिकारी और सिविल सर्जन से बंद पड़े एम्बुलेंस को जल्द से जल्द शुरु कराने की बात की गई । लेकिन इसमें अब तक सफलता नहीं मिली है।

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    विधायक का आरोप- गलती तो हुई ही हैइधर ओबरा के आरजेडी विधायक ऋषि कुमार ने बताया कि विधायक बनने के बाद जिला मुख्यालय की पहली बैठक में इसका मुद्दा उठाया गया था। बताया गया था कि निबंधन की समस्या है। तकनीकी कारणों से निबंधन नहीं हो रहा। अब विधायक कह रहे हैं कि सदन शुरू होगा तो इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे।

    क्या कहना है डीएम काडीएम सौरभ जोरवाल से जब एम्बुलेंस शुरू कराने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश से उनका निबंधन नहीं हो सकता है। एंबुलेंस पुरानी मॉडल की हैं, जिन पर रोक है। आपदा में सरकार ने आवश्यकतानुसार अतिरिक्त एम्बुलेंस क्रय करने अथवा किराए पर लेने की अनुमति दी है। लेकिन एम्बुलेंस को लेकर समस्या नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब एंबुलेंस खरीदी गई थी तब तो पुरानी नहीं थी। उस वक्त इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?

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