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Bihar News- चुनावी मैदान के बाहर के खिलाड़ी बांकीपुर के खेल को नितिन नवीन के लिए बना रहे भारी

बांकीपुर में मैदान से बाहर हुए कई खिलाड़ी और निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव को रोचक और भाजपा के लिए परेशानी भरा बना रहे हैं।

पटना की तीन शहरी सीटों में से एक बांकीपुर की चुनावी लड़ाई सबसे दिलचस्प बन चुकी है। इसे दिलचस्प बना रहे हैं, मैदान के बाहर के खिलाड़ी। बांकीपुर में सुषमा साहू का नामांकन रद्द होने के बाद खुद तो वो चुनावी मैदान से बाहर हैं, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी लव सिन्हा को समर्थन देकर अपनी पुरानी पार्टी भाजपा के प्रत्याशी नितिन नवीन की परेशानी बढ़ा दी है। यूं तो इस सीट पर भाजपा को हमेशा बड़ी जीत मिलती रही है, लेकिन इस बार यहां मैदान में उतरे नये और युवा चेहरों ने नितिन नवीन को परेशान जरूर किया है। इस सीट पर पिछली बार कांग्रेस के कुमार आशीष मैदान में थे, जिन्हें नितिन नवीन ने 39 हजार से अधिक वोटों से हराया था। ये तब के नतीजे थे जब भाजपा, जदयू से अलग चुनाव लड़ रही थी।

तीन युवा चेहरों की दिलचस्प लड़ाई

बांकीपुर में कांग्रेस की तरफ से लव सिन्हा जहां नितिन नवीन को चुनौती देने उतरे हैं, वहीं नई ‘द प्लूरल्स पार्टी’ की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया भी मैदान में हैं। पुष्पम जिस फिल्मी अंदाज में बिहार की राजनीति में इंटर हुईं, उसी अंदाज में उन्होंने बांकीपुर में प्रचार भी किया है। पुष्पम लगातार अपनी शैक्षणिक योग्यताओं को आधार बना खुद को दूसरे उम्मीदवारों से अलग बताने की कोशिश करती रहीं, तो लव सिन्हा बांकीपुर में खुले मैनहोल से लेकर जलजमाव की समस्या जैसे जमीनी मुद्दों के आधार पर अपने लिए वोट मांगते रहे।

मैदान से बाहर हुए खिलाड़ी और निर्दलीय दे रहे ताल

जातिगत समीकरण

बांकीपुर का यादव और मुसलमान वोट समीकरण नितिन नवीन के लिए अहम है, क्योंकि ये राजद के परंपरागत वोटर माने जाते हैं। इस सीट पर वोट के लिहाज से वैश्य समाज सबसे महत्वपूर्ण है, जिसमें सेंघमारी की कोशिश सुषमा साहू के जरिये कांग्रेस कर रही है। नितिन नवीन के लिए सबसे भरोसेमंद वोटर कायस्थ हैं लेकिन लव सिन्हा को उतार कांग्रेस इन्हें भी अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।

कोरोना बन सकता है फैक्टर

कोरोना काल में हो रहे इस चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को होने के आसार हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि भाजपा के परंपरागत वोटर शहरी ही रहे हैं जिनके मतदान के लिए निकलने को लेकर संशय बना हुआ है। अगर मतदान करने के लिए ये बूथों तक नही गए तो बांकीपुर में परेशानी बढ़ सकती है। यहां वोटिंग के प्रतिशत को देखें तो पिछली बार केवल 40 फीसदी मतदान हुआ था। ऐसे में कोरोना ने वोट प्रतिशत को घटाया तो मुश्किल और बढ़ेगी।

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