हाथियों का हमला रोकने के लिए धनबाद के टुंडी में बनेगा डैम, जानें क्या है रणनीति

हाथियों का हमला रोकने के लिए धनबाद के टुंडी में बनेगा डैम, जानें क्या है रणनीति

हाथियों के गांवों में प्रवेश से रोकने के लिए धनबाद के टुंडी वन क्षेत्र में पहाड़ी से बहने वाले नालों-झरनों का पानी रोकने के लिए डैम बनाया जाएगा। गर्मी शुरू होने पर हर साल करीब 20 से 25 हाथियों का झुंड टुंडीवन क्षेत्र से निकल कर जामताड़ा, दुमका में मसलिया होते हुए वापस टुंडी वन पहुंचता है। करीब पांच महीने के दौरान हाथियों का झुंड इंसानों की बस्ती को निशाना बनाता है। फसलों को नष्ट करता है और इस क्रम में प्रतिवर्ष 60 से अधिक जानें जा रही हैं। पिछले वर्ष जुलाई में इसी झुंड से बिछड़े एक हाथी ने दुमका के नौ लोगों को मार डाला था। इसके बाद वन विभाग ने इन हाथियों की प्रवृति का अध्ययन कराया।

राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके वर्मा ने बताया कि हाथियों का झुंड का भोजन और पानी के लिए टुंडी वन से बाहर निकलता है। गर्मी के दिनों में इस वन क्षेत्र में पानी की किल्लत हो जाती है। भोजन का आधार पर घट जाता है। यही बात वन विभाग के अध्ययन में सामने आई है। वन विभाग ने हाथियों के इस झुंड को टुंडी वन में ही सालों भर रोकने के लिए पर्याप्त पानी और भोजन उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई है। 

1.5 करोड़ की योजना मंजूर : टुंडी वन क्षेत्र में मानसून के दौरान पहाड़ों पर नाले-झारने बहकर नदी का रूप ले लेते हैं। यहां 49 लाख की लागत से डैम बनाकर पानी रोका जाएगा। इससे जगह-जगह तालाब का निर्माण हो सकेगा। हाथियों को काफी पानी चाहिए। इससे उन्हें पानी उपलब्ध हो सकेगा। दूसरी ओर हाथियों का पसंदीदा पेड़ बांस के अलावा केले के पौधे लगाए जाएंगे। रांची-टाटा एनएच पर 22 अंडरपास बनाये जाएंगे। इनमें हाथियों के रास्तों को विशेष रूप से शामिल किया गया। राज्य में हाथियों के विचरण वाले छह रास्तों को चिह्नित किया गया है। इनके आसपास क्विक रिस्पांस टीम गठित की गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मानव हाथी संघर्ष को कम करने के लिए क्विक रिस्पांस टीम की जिम्मेदारी तय कर दी है। 

 झारखंड के आसपास देश के 11 प्रतिशत हाथी : वन विभाग के मुताबिक देश के 11 प्रतिशत हाथी मध्य पूर्वी भारतीय क्षेत्र पश्चिम बंगाल (दक्षिण), ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में हैं। हाथी के हमले के 45 फीसदी मामले इन्हीं क्षेत्रों में हो रहे हैं। इसलिए  हाथियों के हमले को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग अंतरराज्यीय समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। झारखंड में पिछले दस वर्षों में हाथियों के हमले में करीब 700 लोगों की जान जा चुकी है।