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सोनपुर विधानसभा क्षेत्र: इस सीट ने लालू को दिया ठौर तो राबड़ी को चखाया पराजय का स्वाद  

बिहार में सोनपुर विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर कोई खास नहीं बदली, लेकिन यहां के लोगों ने सियासत के कई दिग्गजों की तकदीर जरूर बदली है। पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक मंच पर छाने वाले कई राजनेताओं को इस भूमि ने पहचान दी। 

सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री रामजयपाल सिंह यादव व पूर्व सीएम रामसुंदर दास यहां के विधायक रहे। 1990 के दशक में सूबे की सियासत में पांव जमाने वाले लालू प्रसाद को विपरीत परिस्थितियों में सोनपुर ने ठौर दिया। सारण संसदीय सीट से दूसरा चुनाव हारने के बाद सोनपुर के लोगों ने 1980 व 1985 में उन्हें अपना विधायक बनाया, पर उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को नकार दिया। 2010 के चुनाव में उन्हें पराजय का स्वाद चखाया। 

कांग्रेस व समाजवादियों के साथ वामपंथी दिग्गज को भी मौका
सोनपुर ने कांग्रेसियों के साथ समाजवादी नेताओं व वामपंथियों को भी मौका दिया। 1952 में पहले विधायक कांग्रेस के जगदीश शर्मा बने तो 1967 में चौथे विधायक पूर्व उपमुख्यमंत्री रामजयपाल सिंह यादव। रामजयपाल बाबू तीन बार विधायक रहे। तीसरे चुनाव 1962 में यहां के लोगों ने लीक से हटकर वामपंथी नेता शिवबचन सिंह को अपना विधायक चुना। दूसरे चुनाव 1957 में सारण के स्वतंत्रता सेनानी रामविनोद सिंह को कांग्रेस ने सिम्बल नहीं दिया तो यहां के लोगों ने उन्हें निर्दलीय विधायक बना विधानसभा भेज दिया।  

अबतक चुने गये विधायक
1952    जगदीश शर्मा (कांग्रेस)
1957    रामविनोद सिंह (निर्दलीय)
1962    शिव बचन सिंह (कम्युनिस्ट)
1967-72 रामजयपाल सिंह यादव (कांग्रेस)
1977    रामसुंदर दास (जनता पार्टी)
1980-85 लालू प्रसाद यादव (जद एस-लोकदल)
1990-95 राज कुमार राय (जनता दल)
2000    विनय कुमार सिंह (बीजेपी)
2005    डॉ. रामानुज प्रसाद (राजद)
2010    विनय कुमार सिंह (बीजेपी)
2015    डॉ. रामानुज प्रसाद (राजद)

रामसुंदर दास बने सीएम तो लालू नेता विरोधी दल 
प्रखर समाजवादी नेता रामसुंदर दास 1977 में यहां के विधायक बने। यहीं के विधायक रहते वे 1979 में सूबे के मुख्यमंत्री बने। 1977 का संसदीय चुनाव सारण से जीत राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले लालू प्रसाद को 1980 के संसदीय चुनाव में हार का स्वाद चखना पड़ा। फिर उस साल के विधानसभा चुनाव में वे जनतादल सेक्यूलर व 1985 के चुनाव में लोकदल से सोनपुर के विधायक बने। इस दौरान नेता विरोधी दल की कुर्सी पर बैठ सूबे की सियासत में अपनी पैठ बनाई। पैठ भी ऐसी कि 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। 1997 से 2005 तक उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद 2010 के विधानसभा के समर में जब राबड़ी देवी सोनपुर में उतरीं तो बीजेपी के विनय कुमार सिंह ने 20,685 वोटों के अंतर से उन्हें पराजित कर दिया। पूर्व सीएम राबड़ी देवी की हार का बदला उनके ही दल के नेता डॉ. रामानुज प्रसाद राय ने दूसरे ही चुनाव में विनय सिंह से ले लिया। उन्होंने 2015 के चुनाव में 36,356 वोटों के अंतर से बीजेपी नेता विनय कुमार सिंह को शिकस्त दी। 

33 पंयायत व 39 शहरी वार्ड है विधानसभा क्षेत्र में
सोनपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 1952 में हुआ। पिछले परिसीमन में सारण के सभी विधानसभा क्षेत्रों का स्वरूप बदला, लेकिन सोनपुर का भूगोल पूर्ववत रह गया। दो प्रखंडों सोनपुर व दिघवारा के सम्मिश्रण से बने इस विधानसभा क्षेत्र में 33 ग्राम पंचायतें व दो नगर पंचायत क्षेत्र हैं। सोनपुर के 23 व दिघवारा के 10 पंचायत के साथ सोनपुर नगर पंचायत के 21 व दिघवारा के 18 वार्ड इस विधानसभा क्षेत्र में हैं।

हरिहरक्षेत्र मेला व हरदिया चंवर है पहचान
गंगा व गंडक नदियों से गलबहिया डाले सोनपुर विधानसभा क्षेत्र कृषि आधारित है। उद्योग विहीन इस विधानसभा क्षेत्र की बड़ी पहचान हरिहर क्षेत्र मेला है। इसकी पहचान कभी एशिया फेम पशु मेले की थी। बदलते परिवेश में इस ऐतिहासिक मेले का ह्रास होता चला जा रहा है। राष्ट्रीय मेला घोषित करने की कवायदें तो खूब हुईं, लेकिन घोषणा का इंतजार अब भी है। बाबा हरिहरनाथ और शक्तिपीठ आमी के पर्यटक स्थल बनने का सपना भी अधूरा पड़ा है। विशाल हरदिया चंवर की जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से यहां की विशाल कृषि भूमि किसानों के लिए अभिशाप बनी है।  

डॉ. रामानुज प्रसाद (राजद)- 86,082

2015 का विधानसभा चुनाव

विनय कुमार सिंह (बीजेपी)- 49,686

कुल मतदाता- 2,81,271 

1,50,970 पुरुष
1,30,300 महिला
 

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