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सुगौली विधानसभा सीट : एनडीए का चौका रोकने के लिए फील्डिंग मजबूत कर रहा महागठबंधन

नेपाल-भारत के रिश्तों के बीच इस ऐतिहासिक जगह की खास पहचान है। नाम सुगौली। इसका इतिहास जितना सुनहरा है, आज का भूगोल उतना ही दुरूह। 1816 की सुगौली संधि से ही इंडो-नेपाल बॉर्डर की एक नई लकीर खींची गई थी जिस पर आज भी गाहे-बगाहे खड़ा होता विवाद तूल पकड़ लेता है। अंग्रेजों के लिए खास रहे सुगौली की दशा-दिशा आजादी के सात दशक बाद भी बहुत नहीं बदली है। हर साल की बाढ़-कटाव यहां की खुशियां बहा ले जाती है। चुनावी जंग में इस वीआईपी सीट पर हमेशा आर-पार की लड़ाई होती है। कांग्रेस के पंजे की पकड़ यहां ढीली पड़ी तो कम्युनिस्टों का गढ़ बन गया और जब लाल झंडा निस्तेज हुआ तो भगवा लहर उठा। फिलहाल सुगौली में एनडीए का चौका रोकने के लिए महागठबंधन सीमा रेखा पर अपनी फील्डिंग मजबूत कर रहा है।  
पूर्वी चंपारण जिले की इस सीट पर कालांतर में कांग्रेस व वाम दल का दबदबा रहा है। इनका रंग फीका पड़ने पर भाजपा ने हैट्रिक लगा दी। 1957 से 1985 तक चार बार कांग्रेस ने यहां परचम लहराया। 1977 से 1990 तक तीन बार सियासी जंग में सीपीएम का झंडा बुलंद हुआ। दो बार 1995 व 2000 में निर्दलीय हावी रहे। इसमें वर्ष 2000 में जीते विजय प्रसाद गुप्ता मंत्री बने। वर्ष 2005 (अक्टूबर) से 2015 तक में भाजपा इस सीट को कब्जाते चली आयी।  वर्तमान विधायक रामचंद्र सहनी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए वर्ष 2010 में चुनाव जीतने के बाद पहली बार मंत्री बने। सीटिंग विधायक की उम्मीदवारी एनडीए में ज्यादा मजबूत दिख रही। वहीं महागठबंधन को दमदार लड़ाके की तलाश है। फिलहाल कई की हसरतें कुलाचे मार रहीं, पर अभी पत्ता खुला नहीं है। अंदरखाने में सब गोटी फिट कर रहे।  
 
न बाढ़ से मुक्ति मिली और न मिला अनुमंडल का दर्जा

सुगौली विस क्षेत्र में सुगौली प्रखंड की सोलह पंचायत व एक नगर पंचायत और रामगढ़वा प्रखंड की सोलह पंचायतें हैं। सुगौली की दस पंचायत व एक नगर पंचायत में बाढ़ आने पर जमकर तबाही मचती है। वहीं रामगढ़वा प्रखंड की सात पंचायतों में बाढ़ से जनता त्रस्त रहती है। बाढ़ से स्थायी निदान के साथ साथ सुगौली को अनुमंडल व रघुनाथपुर को प्रखंड का दर्जा देने की मांग यहां वर्षों पुरानी है।

 1816 की सुगौली संधि से बदला था सीमाई भूगोल
1805 में नेपाली राजा की विस्तारवादी सोच से जब भारतीय भूभाग नेपाल के कब्जे में जाने लगे तब ईस्ट इंडिया कंपनी बिदक गई। अंग्रेजों से गोरखा युद्ध छिड़ गया। दो साल लंबे चले ब्रिटिश-नेपाली युद्ध को खत्म करने के लिए 1816 में, ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल की गोरखा राजशाही ने सुगौली में ही संधि पर हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत, मिथिला क्षेत्र का एक हिस्सा भारत से अलग होकर नेपाल के अधिकार क्षेत्र में चला गया जिसे नेपाल में आज पूर्वी तराई या मिथिला कहा जाता है। प्राचीन रियासत मिथिला की राजधानी जनकपुर सहित एक बड़ा भू-भाग पड़ोसी देश का हिस्सा बन गया। 1816 की इस संधि पत्र पर नेपाल की ओर से राजगुरु गजराज मिश्र और अंग्रेजों की ओर से लेफ़्टिनेंट कर्नल पेरिस ब्रैड शॉ ने हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद ही काठमांडू में एक ब्रिटिश प्रतिनिधि की नियुक्ति हुई और ब्रिटिश सेना में गोरखाओं की भर्ती की जाने लगी।

सुगौली में भी सुलगी थी 1857 के विद्रोह की आग
 सुगौली में ब्रिटिश सेना की छावनी थी। मंगल पांडे जैसे क्रांतिकारियों के दल ने जब 1857 का विद्रोह शुरू किया तो छावनी दर छावनी सुगौली तक यह क्रांति पहुंच गई थी। नेपाल के राजा ने त्वरित सैन्य मदद पहुंचाकर इस विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों की मदद की थी।  

 कुल मतदाता: 2,78,543
महिला मतदाता: 1,29,449
पुरुष मतदाता: 1,49,094
कुल आबादी: 6,11,466
थर्ड जेंडर: 09
प्रखंड: सुगौली व रामगढ़वा
मतदान केंद्र: 414

कब कौन किस पार्टी से जीता
1957 जयनारायण कांग्रेस
1962 विद्या किशन कांग्रेस
1967 मोहनलाल मोदी बीजेएस
1969 बद्री नारायण झा कांग्रेस
1972 अजीजुल हक एसओपी
1977 रामाश्रय सिंह सीपीएम
1980 रामाश्रय सिंह सीपीएम
1985 सुरेश मिश्र कांग्रेस
1990 रामाश्रय सिंह सीपीएम
1995 चंद्रशेखर द्विवेदी निर्दलीय
2000 विजय प्रसाद गुप्ता केएसपी
2005(फरवरी) विजय प्रसाद गुप्ता केएसपी
2005(अक्टूबर) रामचंद्र सहनी भाजपा
2010 रामचंद्र सहनी भाजपा
2015 रामचंद्र सहनी भाजपा

 

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